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Badrinath: कपाट बंद होने पर धाम में उमड़ी भक्तों की भीड़, माणा की महिलाओं ने तैयार की थी ये खास भेंट, तस्वीरें

Sat, 19 Nov 2022 03:40 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, जोशीमठ (चमोली)
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बदरीनाथ धाम के कपाट बंद - फोटो : अमर उजाला
बदरीनाथ धाम के कपाट आज शनिवार को अपराह्न 3 बजकर 35 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। इसके बाद अगले छह माह तक भगवान बदरीनाथ की पूजा पांडुकेश्वर और जोशीमठ में संपन्न होगी। बदरीनाथ धाम के सिंह द्वार को गेंदे के फूलों से सजाया गया।

शुक्रवार को पंच पूजाओं के चौथे दिन माता लक्ष्मी का आह्वान कर पूजन संपन्न हुआ। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना तथा कढ़ाई भोग अर्पित किया गया। शनिवार को रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी स्त्री वेश धारण कर माता लक्ष्मी की प्रतिमा को बदरीनाथ धाम के गर्भगृह में प्रतिष्ठापित किया और उद्धव व कुबेर जी की प्रतिमा को मंदिर परिसर में लाया गया।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि माणा गांव की महिला मंगल दल की महिलाओं की ओर से तैयार किए गए घृत कंबल (घी में भिगोया ऊन का कंबल) को भगवान बदरीनाथ को ओढ़ाया गया। इसके बाद अपराह्न 3 बजकर 35 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
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बदरीनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
शीतकाल में (दिसंबर से मई माह तक) बदरीनाथ धाम बर्फ के आगोश में रहता है। दिसंबर से फरवरी तक धाम से हनुमान चट्टी (10 किमी) तक बर्फ जम जाती है। इस दौरान बदरीनाथ धाम में पुलिस के जवानों और मंदिर समिति के दो कर्मचारियों की ही तैनाती रहती है।

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बदरीनाथ में बर्फबारी - फोटो : अमर उजाला
चीन सीमा क्षेत्र होने के कारण माणा गांव में आईटीबीपी के जवान रहते हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने पर यहां निवासरत बामणी व माणा गांव के ग्रामीणों के साथ ही व्यवसायी बदरीनाथ धाम छोड़कर निचले क्षेत्रों में चले जाते हैं। इसके बाद सेना के जवानों को छोड़कर किसी भी आम व्यक्ति को हनुमान चट्टी से आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाती है।

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बदरीनाथ में बर्फबारी - फोटो : अमर उजाला
जोशीमठ की एसडीएम कुमकुम जोशी ने बताया कि बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के दिन तक सभी होटल, ढाबा व अन्य व्यवसायियों को बदरीनाथ धाम छोड़ने के लिए कहा जाता है। कपाट बंद होने के बाद आम लोगों को धाम तक जाने की अनुमति नहीं दी जाती है। 
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बदरीनाथ में बर्फबारी - फोटो : अमर उजाला
बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि बदरीनाथ धाम में पूजा पद्धति की पौराणिक धार्मिक परंपरा का आज भी पूरे विधि विधान से निर्वहन हो रहा है। सनद कुमार संहिता और नारद पुराण में कहा गया कि है कि बदरीनाथ क्षेत्र को भू बैकुंठ कहा जाता है।
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जब विष्णु भगवान बदरीनाथ के रूप में यहां ध्यान मुद्रा में रहे तो मानवों और देवताओं में बदरीनाथ की पूजा को लेकर मतभेद हो गया। तब ब्रह्मा के चार पुत्र सनक, सनंदन, सनातन और सनत कुमार ने बदरीनाथ की पूजा को लेकर मध्यस्थता की। उन्होंने कहा कि वर्ष में मानव और देवता छह-छह माह तक बदरीनाथ की पूजा करेंगे।
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आदि गुरु शंकराचार्य की ओर से शुरू की गई परंपरा के अनुसार बदरीनाथ की पूजा दक्षिण भारत के मुख्य पुजारी ही पूजा करते हैं जिन्हें रावल कहते हैं। मूर्ति को छूने का अधिकार भी सिर्फ मुख्य पुजारी को ही होता है।
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