फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देश का एक मात्र मंदिर जहां मुस्लिम की लिखी आरती से पूजा करते हैं ब्राह्मण

Fri, 05 May 2017 05:47 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 8
ह‌िंदू धर्म में सद‌ियों से यह परम्परा चली आ रही है क‌ि मंद‌िर में पूजा स‌िर्फ ब्राह्मण ही करेंगे। वहीं पूजा के ल‌िए ज‌ितने भी ग्रंथ ल‌िखे गए हैं वे भी ब्राह्मणों ने ही ल‌िखे हैं। लेक‌िन एक मंद‌िर ऐसा भी है जहां पूजा स‌िर्फ मुस्ल‌िम के द्वारा ल‌िखी आरती से ही की जाती है। 
विज्ञापन

2 of 8
तो चल‌िए हम आपको बताते हैं इस सांप्रदायिक सौहार्द की कहानी। भगवान बद्रीनाथ धाम को हिंदुओं का तीर्थ माना जाता है और यहां उनकी पूजा स‌िर्फ ब्राह्मण ही कर सकते हैं। लेकिन क्या आपको पता है क‌ि बद्रीव‌िशाल की आरती क‌िसने ल‌िखी है। 
विज्ञापन

3 of 8
151 सालों से कपाट खुलने से बंद होने तक मंदिर में नित्य सुबह-शाम जो आरती गाई जाती है, उसे एक मुस्लिम शायर ने लिखा है और वह शायर है चमोली जिले के नंदप्रयाग निवासी फकरुद्दीन (बदरुद्दीन)। 

4 of 8
बदरुद्दीन ने यह आरती वर्ष 1865 में लिखी थी । जब से ये आरती ल‌िखी गई है तब से भगवान बद्री विशाल की पूजा परंपराओं की शुरुआत इसी आरती के साथ होती है। 
विज्ञापन

5 of 8
badrinath rawal
जब ये आरती फकररुद्दीन ने ल‌िखी थी तब उनकी उम्र महज 18 साल थी। इस आरती में बदरीनाथ धाम के धार्मिक महत्व के अलावा यहां की सुंदरता का भी वर्णन किया गया है। 
विज्ञापन

6 of 8
बता दें क‌ि फकरुद्दीन तब नंदप्रयाग में पोस्टमास्टर हुआ करते थे और इस आरती को लिखने के बाद उन्होंने अपना नाम बदरीनाथ के नाम पर बदरुद्दीन रख लिया था।
विज्ञापन

7 of 8
104 वर्ष की उम्र में वर्ष 1951 में बदरुद्दीन का निधन हुआ। बदरुद्दीन के पोते अयाजुद्दीन सिद्दिकी के मुताब‌िक बद्रीनाथ धाम में मंदिर परिसर की दीवारों पर पहले पूरी की पूरी आरती लिखी गई थी। जिस व्यक्ति को यह आरती कंठस्थ नहीं होती, वह मंदिर की दीवारों पर देखकर आरती गाता था।
विज्ञापन

8 of 8
गौरतलब है क‌ि बद्रीनाथ धाम के कपाट आगामी छह मई को तीर्थयात्रियों के ल‌िए खोल‌ द‌िए जाएंगे। इस अवसर पर भगवान बद्रीव‌िशाल की आरती के साथ ही होगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें