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सरकारी कर्मचारियों के लिए जारी हुआ नया फरमान, पढ़ लें नहीं तो फिर पछताएंगे

Mon, 29 Jan 2018 08:55 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : Getty
अगर आप सरकारी नौकरी में हैं तो सरकार ये फरमान जरूर पढ़ लें, नहीं तो आपकी परेशानी बढ़ सकती है।





 
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सरकारी नौकरी
सरकार ने सख्त रूख अपनाते हुए कुछ सरकारी नौकरी में तैनात कर्मचारियों के नए ‌नियम बनाए है। सरकारी सेवा में तैनात लोकसेवक तबादले के लिए यदि माता-पिता, पत्नी या अन्य रिश्तेदारों से प्रार्थना पत्र दिलवाता है या किसी की सिफारिश कराने का प्रयास करता है तो उसे तबादला अधिनियम के तहत सजा के दायरे में माना जाएगा।

 
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trivendra singh rawat
विधानसभा में ध्वनिमत से पारित प्रवर समिति की सिफारिश पर पेश संशोधित उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण विधेयक 2017 में यह प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम प्रदेश के सभी विभागों, निगमों, व नगर निकायों आदि में भी लागू किया जा सकेगा।

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कोर्ट - फोटो : amar ujala
संशोधित विधेयक में यह व्यवस्था है कि अगर कोई अपना तबादला रुकवाने के लिए परिजनों का आवेदन इस्तेमाल करता है तो इसको कर्मचारी की व्यक्तिगत फाइल में रखा जाएगा और ऐसे आवेदनों को आगे नहीं भेजा जाएगा। इसके बाद उन पर उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 203 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
 
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Transfer Shimla
बता दें कि, हर साल 31 मार्च से तबादला प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। विधेयक में अनिवार्य तबादलों में सुगम से दुर्गम व दुर्गम से सुगम में तबादले से छूट के मामलों में कई गंभीर बीमारियों को शामिल किया गया है। विधेयक में जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक तैनाती वाले विभागों के लिए दुर्गम-सुगम के मानक निर्धारित करने के लिए अगल-अलग स्तर की समितियों का प्रावधान किया गया है।
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Transfer Shimla
जिला मुख्यालय से ग्राम स्तर तक तैनात होने वाले कर्मचारियों के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी दुर्गम-सुगम चिह्नित करेगी। लेकिन 70 हजार फीट की ऊंचाई वाले स्थान पर एक साल की तैनाती दुर्गम की दो साल की तैनाती मानी जाएगी।
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prakash pant
तबादला अधिनियम बन जाने के बाद तबादलों में पारदर्शिता होगी और दुर्गम क्षेत्रों में जाने से कतराने वाले लोकसेवकों को वहां भेजा जा सकेगा। कोई सिफारिश नहीं चलेगी। पात्र लोगों को ही सुगम-दुर्गम में तैनाती का लाभ मिलेगा। अधिनियम निकायों पर लागू हो सकता है।
-प्रकाश पंत, संसदीय कार्यमंत्री।
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