चुनाव के दौरान जब उन्होंने यह देख लिया कि अमेठी से उनकी हार तय है, तो उन्होंने केरल की वायनाड की सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय ले लिया और कांग्रेस को अनाथ होने से बचा लिया। राहुल गांधी अध्यक्ष रहें या नहीं, इसे उन्होंने कांग्रेस का अंदरूनी मामला बताया।