धनतेरस को धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। खरीदारी के लिए यह दिन बेहद शुभ है। इस दिन समुद्र से देवताओं के वैद्य धनवंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस तिथि में आभूषण, बर्तन, वस्त्र, स्वर्ण, चांदी, पीतल के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। त्रयोदशी तिथि का आरंभ बृहस्पतिवार शाम 4.06 बजे से शुक्रवार शाम 6.10 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल शाम 5.28 बजे से 8.04 बजे तक है।
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धनतेरस
उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार धनतेरस पर प्रदोष काल में अन्न की ढेरी पर घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण मुख तेल का दीपक प्रज्वलित करने पर अकाल मृत्यु का भय नहीं होता। प्रदोष काल व्यापिनी त्रयोदशी पूजन के लिए शुभ मानी जाती है।
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DHANTERAS
डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार इस दिन भूमि, वाहन आदि भी क्रय कर सकते हैं। बताया कि खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त अमृत की चौघड़िया सुबह 9.12 बजे से 10.37 बजे तक रहेगा। इस अवधि में धनवंतरी की पूजा करें। सुबह 11.38 से 12.23 बजे तक अभिजीत मुहूर्त है, लेकिन सुबह 10.36 से 12.02 बजे तक राहु काल रहेगा। इस बीच शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
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dhanteras market
- फोटो : अमर उजाला
12.02 से मध्याह्न 1.26 बजे तक शुभ की चौघड़िया सोना, चांदी, वाहन आदि का क्रय करने के लिए उत्तम है। शाम 4.16 बजे से 5.40 बजे तक चार की चौघड़िया में वस्त्र, धातु, आभूषण की खरीदारी करना शुभ रहेगा। रात्रि 8.50 बजे से 10.26 बजे तक लाभ की चौघड़िया रहेगी।
इस अवधि में खरीदारी कर सकते हैं। बहीखाता पूजन के लिए सुबह 9.12 बजे से 10.37 तक का समय सही रहेगा। साथ ही 12.02 बजे मध्याह्न से 1.26 बजे तक शुभप्रद रहेगा।