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औली में शाही शादी: एक दूजे के हुए सूर्यकांत-कृतिका, सात फेरे लेते ही सबसे पहले किया ये काम

Fri, 21 Jun 2019 10:16 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औली
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औली में शाही शादी - फोटो : अमर उजाला
औली की खूबसूरत वादियों में सात फेरे लेकर अजय गुप्ता के बेटे सूर्यकांत और हीरा व्यापारी सुरेश सिंघल की बेटी कृतिका एक दूसरे के हो गए। शादी समारोह संपन्न होने के बाद शाम साढे चार बजे दूल्हा सूर्यकांत और दुल्हन कृतिका जोशीमठ तहसील में शादी का पंजीकरण करने पहुंचे। एसडीएम वैभव गुप्ता ने जरुरी दस्तावेजों को पूर्ण करवा कर वर-वधू का ऑन लाइन वैवाहिक पंजीकरण करवाया।
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मैरिज रजिस्ट्रेशन कराते सूर्यकांत और कृतिका - फोटो : अमर उजाला
औली में शादी समारोह संपन्न होने के बाद 23 जून को गुप्ता बंधु बदरीनाथ धाम पहुंचेंगे। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि बदरीनाथ धाम को बीस क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया जा रहा है। 23 जून को गुप्ता बंधु अपने बेटों व बहुओं के साथ भगवान बदरीनाथ का आशीर्वाद लेने बदरीनाथ धाम पहुंचेंगे। 
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औली में शाही शादी - फोटो : अमर उजाला
गुप्ता बंधुओं के बेटे की शादी के दौरान बृहस्पतिवार को स्थानीय महिलाएं भी औली पहुंची हुई थी। गुप्ता बंधुओं की ओर से चिदानंद स्वामी व आचार्य बालकृष्ण ने एक सौ से अधिक महिलाओं को साड़ी और शगुन भेंट किया। शादी समारोह को करीब से देखने के लिए स्थानीय महिला व पुरुष भारी संख्या में औली पहुंचे हुए थे। हालांकि उन्हें शादी समारोह स्थल से कुछ दूरी पर ही रोका गया था।

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औली में शाही शादी - फोटो : अमर उजाला
गुप्ता बंधुओं की माता अंगूरी देवी ने कहा कि संत और ऋषियों के आशीर्वाद से हमारे बच्चों को अच्छे संस्कार मिले हैं। भगवान बदरीनाथ, केदारनाथ के साथ ही देवभूमि की सेवा की है। आज शादी समारोह संपन्न होने पर मन को सुकून मिला है। 
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औली में शाही शादी - फोटो : अमर उजाला
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि गुप्ता बंधुओं के बेटों की शादी से उत्तराखंड में पर्यटन के साथ ही संस्कृति आश्रित पर्यटन के भी नए द्वार खुल गए हैं। बिना किसी पर्यावरण को क्षति पहुंचाए औली में शादी समारोह हो रहा है। स्थानीय लोग भी इस समारोह से खुश नजर आए। 
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औली में शाही शादी - फोटो : अमर उजाला
स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि हिमालय की संस्कृति को पूरे विश्व में पहचान दिलाने के लिए औली में यह शादी समारोह का आयोजन किया गया। जिस हिमालय क्षेत्र में भगवान शिव और पार्वती की शादी हुई, आज भी देवभूमि का संस्कार और संस्कृति बची रहे, इसलिए यह शादी यहां की गई है। इस शादी से स्थानीय लोगों को भी फायदा मिला है। 
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