20 फरवरी तक ग्रह-नक्षत्रों में बदलाव हो रहा है। जिसे ध्यान मे रखते हुए ज्योतिषाचार्यों ने सावधान किया है।
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astrology
- फोटो : google
ज्योतिषाचार्य पीएसए राणा ने बताया कि जब चंद्रमा गोचर में कुंभ और मीन राशि से होकर गुजरता है तो यह समय अशुभ माना जाता है। इस दौरान चंद्रमा घनिष्ठा से लेकर शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती से होते हुए गुजरता है। इसमें नक्षत्रों की संख्या पांच होती है। इस कारण इन्हें पंचक कहा जाता है। और यह बदलाव 15 फरवरी से 20 फरवरी के बीच हो रहा है।
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zodiac sign
अशुभ और हानिकारक नक्षत्रों के योग को ही पंचक कहा जाता है। इसलिए ग्रहों और नक्षत्र के अनुसार ही किसी काम को करने या न करने के लिये समय तय किया जाता है। पंचक शुभ मुहूर्त में आरंभ होने वाले काम मंगलकारी होते हैं जबकि शुभ मुहूर्त को अनदेखा करने पर बड़ा नुकसान होने का खतरा रहता है। भारतीय ज्योतिष में पंचक को अशुभ माना गया है। इस बार 15 फरवरी की शाम लगभग 7:50 बजे से पंचक शुरू हुआ है जो 20 फरवरी मंगलवार को दोपहर लगभग 12.50 तक रहेगा।
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राशिचक्र
पंचक में चारपाई बनवाना भी अच्छा नहीं माना जाता। विद्वानों के अनुसार ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इस दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है। दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है। जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए। इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है। शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
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astrology
पंचक में आने वाले नक्षत्रों में शुभ कार्य हो सकते हैं। पंचक में उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, जो धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं।पंचक को भले ही अशुभ माना जाता है, लेकिन इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं। पंचक में आने वाले तीन नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद व रेवती रविवार को होने से आनंद आदि 28 योगों में से चर, स्थिर व प्रवर्ध शुभ योग बनते हैं।
पंचक में सावधानियां न बरतने पर धनिष्ठा नक्षत्र में आग लगने का भय रहता है। शतभिषा नक्षत्र में वाद-विवाद होने के योग बनते हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में बीमारी होने की संभावना सबसे अधिक होती है। उत्तरा भाद्रपद में धन हानि के योग बनते हैं। रेवती नक्षत्र में नुकसान व मानसिक तनाव होने की संभावना होती है।