उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
यह उठ रहे सवाल
- दस्तावेज में फर्जीवाड़ा मिलने पर उसका दाखिला रद्द क्यों नहीं किया गया?
- निष्कासन के बाद किस आधार पर दो छात्रों को क्लास लेने की अनुमति मिली?
- 52 निष्कासित छात्रों में से केवल दो छात्रों को ही कक्षाओं में बैठने का आदेश क्यों?
- कोर्स पूरा होने के चार साल बाद भी विवि ने इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की?
मामले में जांच के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था जो कि कोर्ट में विचाराधीन है। चूंकि पुलकित आर्य व अन्य छात्र अभी दोषी साबित नहीं हुए, इसलिए उन्हें पढ़ने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता था। वह पास जरूर हुआ है लेकिन अभी डिग्री अवॉर्ड नहीं की गई।
-डॉ. राजेश कुमार, प्रभारी कुलसचिव, आयुर्वेद विवि