16 अप्रैल यानी आज वैसाख मास की अमावस्या मनाई जा रही है। सोमवार होने के कारण यह अमावस्या सोमवती कहलाती है। इसे शास्त्रों ने बेहद फलदायनी बताया है।
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Amavasya
- फोटो : अमर उजाला
पंडित रमेश सेमवाल ने बताया कि शास्त्रनुसार इस दिन कुश (एक प्रकार की घास) को बिना अस्त्र शस्त्र के उपयोग किए उखाड़ कर एकत्रित करने का विधान है। अतः इस दिन एकत्रित किए हुए कुश का प्रभाव 12 वर्ष तक रहता है। इस दिन पितृ पिण्डदान, तर्पण, स्नान, व्रत व पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन तीर्थ के नदी-सरोवरों में तिल प्रवाहित करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
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peepal
इस दिन मौन व्रत रखने से सहस्र गोदान का फल मिलता। सोमवती अमावस्या पर शिव आराधना का महत्व है। इस दिन सुहागीन पति की दीर्घायु के लिए पीपल में शिव वास मानकर पूजन कर परिक्रमा करती हैं। आज के विशेष पूजन से सर्वार्थ सफलता मिलती है, पितृ दोष से मुक्ति मिलती है तथा सुहाग की रक्षा होती है।
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moon
- फोटो : moon
27 सालों बाद इस बार सोमवती अमावस्या को विशेष योग बन रहा है। वैसाख के कृष्ण पक्ष में, सोमवार को सूर्य और चंद्रमा एक साथ अश्विन नक्षत्र में आ रहे हैं। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी पड़ रहा है।
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शिवलिंग
विशेष पूजन विधि:
शिवलिंग व पीपल पर पूजा करें। तिल के तेल का दीपक जलाएं, चंदन से धूप करें, सफ़ेद चंदन, सफ़ेद तिल, सफ़ेद फूल चढ़ाएं, दूध चढ़ाएं, खीर का भोग लगाकर 108 बार विशिष्ट मंत्र का जाप करें। इसके बाद खीर गरीबों में बाट दें।