पंडित ओमप्रकाश सती ने बताया कि सोमवती अमास्या के दिन तड़के स्नान और फिर सारे दिन पूजा-पाठ और दान-दक्षिणा करने से लाभ मिलता है। आज पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है इसलिए इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत भी कहा जाता है। सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान का भी विशेष महत्व होता है।