अंडर कवर रिपोर्टर 1
रात 9.30 बजे रहे थे, मैं चंद्रबनी रोड पर पहुंची। यह इलाका सुनसान था और दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था। मैंने पुलिस के 112 नंबर पर डायल किया, लेकिन नंबर नहीं मिला। इसके बाद मैं बार-बार नंबर ट्राई करती रही। 9:37 बजे 112 नंबर पर कॉल जाती है और पुलिसकर्मी कॉल रिसीव करता है। मैने कहा-‘ सर, मैं चंद्रबनी पर खड़ी हूं, मेरी स्कूटी खराब हो गई है। मैं सेफ फील नहीं कर रही हूं, प्लीज आप यहां पहुंचिए, हेल्प कीजिए..’। दूसरी ओर से पुलिसकर्मी कहता है-जल्द ही पुलिसकर्मी आपके पास मदद के लिए पहुंचेंगे और यह कहकर फोन रख देते हैं। पूरी सड़क पर सन्नाटा पसरा हुआ था और आवारा कुत्ते भी घूम रहे थे और पास में आने की कोशिश कर रहे थे। ऐसा माहौल था कि कोई भी अकेली लड़की डर से सहम जाए।
9:40 बजे शराब में धुत दो व्यक्ति राह से गुजर रहे थे। वे मुझे देखकर रुक गए। उसमें से एक व्यक्ति बोला-बेटी क्या हुआ? तू मेरी बेटी समान है, कोई मदद चाहिए हो तो बताना। वे नशे में थे, इसीलिए मैंने उन्हें शुक्रिया बोलकर विदा कर दिया। 9:46 बजे, मुझे पुलिस का कॉल आता है। पुलिसकर्मी कहता है- मैम, आपने हेल्प मांगी थी और प्लीज अपनी लोकेशन बताइए। मैंने उनसे कहा- सर, मैं चंद्रबनी रोड पर खड़ी हूं, मेरी एक्टिवा खराब हो गई है, प्लीज हेल्प कीजिए।
रात 10 बजे मुझे दोबारा पुलिस का कॉल आता है और वो कहते हैं- मैम, किसी अन्य क्षेत्र में झगड़ा हुआ है, हम वहीं फंसे हैं। आप किसी दूसरे से मदद ले लीजिए। 10:04 बजे, पुलिस का तीसरी बार कॉल आता है, पुलिसकर्मी से मैंने फिर मदद मांगी तो उसे यह कहकर फोन रख दिया कि गलत जगह फोन मिला दिया है, सॉरी।कहीं से कोई जवाब नहीं मिला तो मैंने अपनी स्कूटी स्टार्ट की और वहां से निकल गई। रात 10:28 बजे मैं अमर उजाला कार्यालय पहुंची तब पुलिस कंट्रोल रूम से फोन आता है। महिला पुलिसकर्मी मुझसे फीडबैक मांगती है, तब मैने उन्हें बताया कि मैम मुझे कोई मदद नहीं मिली। मैं खुद ही अपने घर पहुंच चुकी हूं। इस पर महिलाकर्मी फोन रख देती हैं।