अहोई अष्टमी
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
पंडित प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार अहोई माता की आकृति दीवार पर गेरू के घोल से बनाएं। सूर्यास्त होते ही अहोई का व्रत पूजन करें। सामग्री में एक चांदी या सफेद धातु की अहोई, चांदी की मोती की माला, जल से भरा हुआ कलश, दूध, हलवा, गन्ना, सिघाड़े व पुष्प तथा दीप के साथ पूजा करें। कथा सुनते समय हाथ में गेहूं के सात दाने व दक्षिणा रखें। वहीं शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न करें।