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तीन तलाक के बाद अब मुस्लिम समुदाय की इन धार्मिक रूढ़ियों को तोड़ेंगी सायरा

Fri, 15 Dec 2017 06:34 PM IST
आरडी खान/ अमर उजाला, काशीपुर
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sayra banu - फोटो : amarujala
तीन तलाक के खात्मे की जंग जीतने से मिली ऊर्जा से लबरेज सायरा ने अब धार्मिक रूढ़ियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने की ठान ली है। सायरा ने अमर उजाला से बातचीत में अपने इरादे जाहिर कर दिए। उन्होंने बताया कि याचिका में उसने हलाला और बहुविवाह प्रथा पर रोक लगाने की भी गुहार लगाई थी। अब वह इन मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में अलग से याचिका दायर करने के लिए मन बना रही हैं। तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद सायरा बानो बुधवार को आरटीसी हेमपुर डिपो में अपने परिवार में पहुंची।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में सायरा ने कहा आज के विकसित युग में 1400 साल पुरानी रूढ़ियों को ढोने का कोई औचित्य नहीं है। धर्मभीरू उलेमा और धार्मिक पेशवा शरीयत का हवाला देकर उन कुप्रथाओं को बनाए रखना चाहते हैं, जो वर्तमान परिपेक्ष्य में बेमानी है। इस्लाम औरत और मर्द को समानता का अधिकार देता है। सायरा ने कहा कि वह तीनों तरह की तलाक के खिलाफ हैं। एक बारगी अगर तलाक-ए-हसना पर अकीदा किया जा सकता है, लेकिन तलाक-ए-बिद्दत को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता था। सायरा ने तलाक के बाद हलाला को लेकर भी सवाल खड़े किए। उसका कहना है कि तलाक के बाद उसी पुरुष से पुनर्विवाह की आड़ में औरत की अस्मत से खिलवाड़ को किस तरह जायज करार दिया जा सकता है। 
 
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sayra banu
बरेली की अंजुम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वह इस बात का समर्थन करती हैं कि तलाकशुदा औरत अगर चाहे तो बगैर हलाले के अपने पति के साथ रह सकती है। कहा, कुरान में हलाला का कहीं जिक्र नहीं है। इस कुप्रथा के चलन को धार्मिक ठेकेदारों का संरक्षण मिला हुआ है। औरत जब किसी के निकाह से निकल जाती है, तो वह आजाद हो जाती है। वह स्वतंत्र होकर अपना हमसफर चुन सकती है या सुलह की सूरत में अपने पति के पास वापस लौट सकती है। आजाद मुल्क में स्वछंद रूप से जीना हर औरत-मर्द का मौलिक अधिकार है।

 

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धार्मिक बेड़ियों में जकड़कर किसी की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। सायरा ने कहा कि वह एक समय में एक से अधिक विवाह करने की भी विरोधी है। इन दोनों मुद्दों को तीन तलाक की याचिका में शामिल किया गया था, लेकिन समय की कमी मानते हुए सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने इस पर विचार नहीं किया। सायरा ने कहा कि इन दोनों मुद्दों पर वह सुप्रीम कोर्ट में अलग से याचिका दायर कर सकती हैं।
 
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तीन तलाक के मुद्दे पर याचिका दायर करने पर सायरा को मुस्लिम धर्मगुरुओं और पर्सनल लॉ बोर्ड के विरोध का सामना करना पड़ा। सायरा ने बताया कि याचिका दायर करने के बाद बोर्ड के उच्च पदाधिकारियों ने उसे और परिवार के अन्य सदस्यों को अक्तूबर-2016 में मुरादाबाद बुलाया। उन्होंने दायर याचिका वापस लेने के लिए सायरा और उनके परिजनों पर दबाव डाला। कहा कि इससे मजहब की बेवजह तौहीन होगी और कुछ हासिल नहीं होगा। कुछ उलेमा ने याचिका को लेकर उसके भाई अरशद से भी एतराज जताया।  
 
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तीन तलाक के मुद्दे पर दिल्ली की स्वयंसेवी संस्था बी-वॉक कलेक्टिव की संचालिका जकिया सुमन ने सायरा की बहुत मदद की। सायरा बताती हैं कि जकिया तीन तलाक के विरोध को लेकर बेहद मुखर हैं। उनकी संस्था हर धर्म की रूढ़ियों के खिलाफ लोगों को जागरूक करने का काम कर रही हैं। तीन तलाक के विरोध के मुद्दे पर जकिया लगातार उनके संपर्क में रहीं। सुनवाई के दौरान वह कई बार सुप्रीम कोर्ट भी आईं। मंगलवार को संविधान पीठ द्वारा आदेश सुनाते समय भी जकिया कोर्ट में मौजूद थीं। सायरा ने बताया कि हलाला और बहुविवाह प्रथा के विरोध में वह जकिया के साथ मिलकर काम करेंगी। 
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