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यूपी माफिया मुन्ना बजरंगी के कुख्यात हत्यारे सुनील राठी के बारे में जानिए ये 10 बातें...

Thu, 12 Jul 2018 07:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
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हत्यारोपी सुनील राठी - फोटो : file photo
बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या में जिस सुनील राठी का नाम सामने आ रहा है। राठी ने 21 साल की उम्र से ही हथियार उठा लिए थे। बागपत जिला कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुख्यात अपराधी सुनील राठी ने 21 साल की उम्र से हत्या, लूट और रंगदारी की वारदातों को अंजाम दिया। वर्तमान समय में सुनील राठी की मां एवं पूर्व चेयरपर्सन राजबाला चौधरी भी रंगदारी के मामले में रुड़की जेल में बंद है। टीकरी कस्बा निवासी सुनील राठी के पिता एवं टीकरी के चेयरमैन नरेश राठी सहित तीन लोगों की 12 दिसंबर 1999 को चुनाव की रंजिश में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस के बर्खास्त सिपाही रणवीर राठी का नाम सामने आया था। रणवीर राठी वही शख्स था, जिसने फूलन देवी के हत्यारोपी शेर सिंह राणा को तिहाड़ जेल से फरार कराया था।
 
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सांकेतिक तस्वीर
इसके बाद उसकी मां राजबाला चौधरी ने वर्ष 2000 नगर पंचायत का चुनाव लड़ा। उनके सामने टीकरी के चेयरमैन सोमपाल राठी के भाई महक सिंह खड़े थे। 21 जून 2000 में सुनील राठी ने अपने साथियों के साथ मिलकर महक सिंह और उसके भाई मोहकम सिंह की हत्या कर दी। इस डबल मर्डर में सुनील राठी आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। 18 अगस्त 2000 में सुनील राठी ने दिल्ली में शोरूम लूटा था। विरोध करने पर तीन लोगों की गोली मारकर हत्या की। इसके बाद से वह जुर्म की दुनिया में धंसता चला गया।
 
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सुनील राठी कोर्ट में पेश करने जाते हुए. - फोटो : amarujala
उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी समेत अन्य राज्यों में भी उसने अपना आपराधिक नेटवर्क खड़ा किया। लेकिन वर्ष 2000 में पुलिस ने उसे हरिद्वार के कनखल की शिवपुरी कॉलोनी से गिरफ्तार कर लिया। उसने जेल के अंदर से ही अपना गिरोह सक्रिय रखा। कई सालों तक रुड़की जेल में बंद रहा। जेल से भी वह अपना गैंग चलाता रहा। इसके बाद उसे तिहाड़ जेल में शिफ्ट किया। यहां पर भी वह अपराध करता रहा। यहां के बाद उसे बागपत जेल में भेजा। बागपत जेल से उसने रुड़की के चिकित्सक से रंगदारी मांगी। अब वह बागपत जेल से अपना गैंग चला रहा है। जेल में एक तरफा उसका ही राज चलता है। बागपत के भूरा फरारी कांड में भी सुनील राठी का नाम सामने आया और मुकदमा चल रहा है।
 

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हैंड ग्रेनेड - फोटो : amar ujala
राठी के गुर्गों ने वर्ष 2011 में रुड़की जेल के बाहर डिप्टी जेलर नरेंद्र सिंह की हत्या की थी। इसके बाद सुपारी लेकर हत्या कराने में उसका नाम चलने लगा। वर्ष 2014 में रुड़की में जेल के बाहर विरोधी चीनू पंडित गैंग पर गोलीबारी करवा अपने वर्चस्व कायम किया। उसकी गैंग में कई शार्प शूटर हैं, जिनकी मदद से राठी जेल से अपना नेटवर्क  ऑपरेट करता है। अब बागपत जेल में माफिया डॉन बजरंगी की हत्या से एक बार फिर सुर्खियों में आया है। वर्ष 2000 में पुलिस के हत्थे चढ़े सुनील राठी के कब्जे से तब हेंड ग्रेनेड (बम) बरामद हुआ था, ऐसे में राठी के तेवरों का अंदाजा साफ साफ लगाया जा सकता है। दो वर्ष पूर्व कनखल थाने की छत पर तब एक हेड ग्रेनेड मिला था, संभवत: वह वहीं था जो राठी से बरामद हुआ था। तब कनखल पुलिस ने बम निरोधक दस्ते ने उस बम को निष्क्रिय किया था।
 
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डेमो - फोटो : डेमो
कुख्यात सुनील राठी के नाम का इस्तेमाल एटीएम की तर्ज पर होता रहा। राठी के नाम से हरिद्वार में कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों से उगाही का कारोबार बदस्तूर जारी है तो विवादित भूमि के पचड़े भी राठी के नाम पर ही एकदम सुलझते रहे। हरिद्वार में राठी की जमीन बेहद ही मजबूत मानी जाती है। इसका खुलासा समय समय पर होता भी रहा है और उसके गैंग में नए नए युवाओं की एंट्री भी होती रही है। राठी के लिए हत्याएं करने वाले शूटरों की टीम अलग होती है लेकिन उसके नाम को अपराध जगत का ब्रांड बनाकर बेचने वाले चेहरे अलग है। हरिद्वार में राठी के नाम का खूब इस्तेमाल होता रहा है और शहर के कई कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों से भारी भरकम रंगदारी वसूल की जाती रही है।

 
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पुलिस - फोटो : अमर उजाला
चूंकि राठी के नाम से ही घबराहट पैदा हो जाती है लिहाजा पुलिस की शरण में जाने का सवाल पैदा नहीं होता। क्योंकि राठी ने कई हत्याएं केवल अपनी निजी दुश्मनी के चलते ही करवाई है, उसी के बूते उसका चौथ का धंधा तरक्की करता चला गया। राठी के नाम को इस्तेमाल करने वाले गुर्गों की भी लंबी चौड़ी फौज है, जो राठी के नाम से धमकी भरे फोन कॉल्स करते या करवाते है और फिर रंगदारी वसूलते है। या फिर विवादित भूमि के पंगे ‘भाई’ के नाम का इस्तेमाल कर सुलझाते है और जमकर वारे न्यारे करते है। कई चेहरे तो राठी से जुड़े है लेकिन कई शातिर राठी के नाम को एटीएम की तरह इस्तेमाल कर रहे है।  
 
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सुनील राठी कोर्ट में पेशी के लिए जाते हुए - फोटो : amarujala
शातिर सुनील राठी अपराध को कभी खुद अंजाम नहीं देता, बल्कि अपने गुर्गों से हत्या, फिरौती जैसे बड़े अपराध करवाता है। रियल इस्टेट और अवैध खनन में भी उसका सीधा नाम नहीं जुड़ता है। अलबत्ता खास गुर्गे उसके इशारे पर कारोबार चलाते हैं। उसके शातिर अंदाज से कई पुलिस अधिकारी गच्चा खा चुके  हैं। सुनील राठी के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच के दौरान उससे हुई पूछताछ कर चुके अफसरों से कुछ इस तरह का फीडबैक मिला है। एक अधिकारी की मानें तो राठी हार्ड क्राइम में माहिर नहीं है, लेकिन बेहद शातिर है। गुर्गों को गैंग में शामिल करने में बेहद सतर्क रहता है।
 

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bhoora - फोटो : amarujala
उसके शातिर दिमाग का ही परिणाम है कि उसने 15 दिसंबर 2014 को बागपत पेशी पर ले जाए जा रहे अपने साथी कुख्यात अमित भूरा को देहरादून पुलिस के चंगुल से छुड़ा लिया था। जेल में तैनात कर्मियों को अपने जाल में फांसने की उसे महारत है। वह जेल से ही रंगदारी का बड़ा नेटवर्क चलाता है। रुड़की के चिकित्सक से 50 लाख की रंगदारी मांगने के आरोप लगे थे। इस मामले में राठी की मां राजबाला को गिरफ्तार किया गया था।  अफसरों की मानें तो राठी कभी उत्तेजित नहीं होता। पूछताछ में घिर जाता है तो अफसरों के पैर पकड़ने में भी नहीं हिचकता है।
 

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munna bajrangi, sunil rathi
कुख्यात सुनील राठी अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद सजग है। उसे पुलिस सुरक्षा पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। जब भी रुड़की कोर्ट में पेशी के लिए आया तो चप्पे चप्पे पर उसके गुर्गे तैनात रहे। खुफिया विभाग के पास भी इसकी जानकारी है कि जेल से निकलने से पहले राठी सुनिश्चित कर लेता है कि गुर्गे तैनात रहें। नवंबर 2017 में देवपाल राणा की रुड़की रामनगर कोर्ट परिसर में हत्या के बाद राठी और सतर्क हो गया है। राठी को सबसे ज्यादा खतरा रुड़की के कुख्यात चीनू पंडित से है। अपने खास गुर्गे देवपाल राणा की हत्या के बाद राठी काफी हद तक कमजोर हो गया था। देवपाल ही राठी के प्रापर्टी के कारोबार को जेल में रहकर संचालित कर रहा था। देवपाल की हत्या के बाद से राठी ने गुर्गों को और भी सजग कर दिया है। 
 
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चीनू को कोर्ट में पेशी के लिए ले जाती पुलिस - फोटो : अमरउजाला
अपराध की दुनिया में कुख्यात सुनील राठी का दुश्मन कभी उसका चेला रहा चीनू पंडित ही है, लेकिन मुन्ना बजरंगी के कत्ल से अब उसने मुख्तार गैंग को चुनौती दी है। इस क्षेत्र के एक और गैंगस्टर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा का माफिया डॉन मुख्तार अंसारी से नजदीकी बताई जाती है। मुख्तार गैंग अब राठी पर पलटवार का मौका तलाशेगी।  इससे राठी और जीवा के बीच गैंगवार के बादल मंडराने लगे हैं। सोमवार को मुन्ना की हत्या के बाद राठी की दुश्मनों की सूची में चीनू पंडित के बाद मुख्तार गैंग के कुख्यात संजीव माहेश्वरी का नाम जुड़ना तय है। मुन्ना के मुख्तार के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। हरिद्वार से लेकर पश्चिम यूपी तक जीवा का बड़ा नेटवर्क है। बदला लेने के लिए मुख्तार गैंग जीवा के नेटवर्क का सहारा ले सकतची है। हालांकि इस वारदात से पहले राठी और जीवा का कभी आमना सामना नहीं हुआ। न ही इन्होंने कभी एक दूसरे के किसी पचड़े में टांग अड़ाई। दोनों गैंग के गुर्गे भी कभी आपस में नहीं उलझे। लेकिन अब दृश्य बदल सकता है। आशंका जताई जा रही है कि राठी से मुख्तार गैंग का बदला लेने को गैंगवार शुरू हो सकता है।  इससे राठी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 
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