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भारत का एक ऐसा शहर जहां जानवरों के भी बनते हैं आधार कार्ड

Sat, 04 Mar 2017 01:47 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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dehradun zoo - फोटो : file photo
अभी तक आपने केवल इंसानों के आधार कार्ड के बारे में सुना होगा। लेकिन देश के इस शहर में जानवरों के आधार कार्ड भी बन रहे हैं। इतना ही नहीं इसके लिए बकायदा उनका बायोडाटा भी तैयार किया गया है।
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dehradun zoo - फोटो : file photo
जी हां, अब जानवरों के आधार नंबर भी बनने शुरु हो गए हैं। देहरादून के मालसी जू में पहली बार जानवरों को माइक्रोचिप लगाई गई है।
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Alligator - फोटो : file photo
यहां गरुड़, मगरमच्छ और कछुए पर माइक्रो चिप लगाई गई है, जिसके बाद उनका ‘आधार’ कार्ड बनाया गया है। इस यूनिक नंबर के आधार पर अब जू में इनका पूरा बायोडाटा तैयार हो गया है।

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owl - फोटो : file photo
माइक्रो चिप को लगाने के बाद जानवर का जो आधार नंबर बना है, उस नंबर के आधार पर जानवर की पूरी जानकारी मिलनी शुरु हो जाएगी।
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malsi deer park - फोटो : AmarUjala
आधार कार्ड बनने से उन पर नजर रखी जाएगी। ताकी उनको कई बीमारियों से भी बचाया जा सके। जानवरों में माइक्रोचिप लगाने के मौके पर विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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malsi deer park - फोटो : AmarUjala
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्देश पर बुधवार को देहरादून जू में गोवा और हरियाणा से आए विशेषज्ञों ने कछुए, गरुड़, गुलदार और मगरमच्छ पर माइक्रोचिप लगाई। वन विभाग के अधिकारियों और पशु चिकित्सक को माइक्रो चिप लगाना सिखाया।
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malsi deer park - फोटो : AmarUjala
डीएफओ पीके पात्रों ने बताया कि जू के जानवरों का आधार कार्ड बनाने की शुरुआत हो गई है। अब धीरे-धीरे जू के सभी पशु-पक्षियों का आधार कार्ड बनाया जाएगा। 
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leopard
आधार नंबर से पता चल जाएगा कि जानवर का जन्म कब हुआ? वह कितने साल का है? कौन की बीमारी हुई? किस जू से लाया गया है और उसके माता-पिता कौन हैं? जानवरों के आधार कार्ड से कई फायदे हैं। माइक्रो चिप लगने से जानवरों की हर मूमेंट पर विभाग नजर रख सकता है।
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