अभी तक आपने केवल इंसानों के आधार कार्ड के बारे में सुना होगा। लेकिन देश के इस शहर में जानवरों के आधार कार्ड भी बन रहे हैं। इतना ही नहीं इसके लिए बकायदा उनका बायोडाटा भी तैयार किया गया है।
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dehradun zoo
- फोटो : file photo
जी हां, अब जानवरों के आधार नंबर भी बनने शुरु हो गए हैं। देहरादून के मालसी जू में पहली बार जानवरों को माइक्रोचिप लगाई गई है।
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Alligator
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यहां गरुड़, मगरमच्छ और कछुए पर माइक्रो चिप लगाई गई है, जिसके बाद उनका ‘आधार’ कार्ड बनाया गया है। इस यूनिक नंबर के आधार पर अब जू में इनका पूरा बायोडाटा तैयार हो गया है।
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owl
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माइक्रो चिप को लगाने के बाद जानवर का जो आधार नंबर बना है, उस नंबर के आधार पर जानवर की पूरी जानकारी मिलनी शुरु हो जाएगी।
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malsi deer park
- फोटो : AmarUjala
आधार कार्ड बनने से उन पर नजर रखी जाएगी। ताकी उनको कई बीमारियों से भी बचाया जा सके। जानवरों में माइक्रोचिप लगाने के मौके पर विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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malsi deer park
- फोटो : AmarUjala
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्देश पर बुधवार को देहरादून जू में गोवा और हरियाणा से आए विशेषज्ञों ने कछुए, गरुड़, गुलदार और मगरमच्छ पर माइक्रोचिप लगाई। वन विभाग के अधिकारियों और पशु चिकित्सक को माइक्रो चिप लगाना सिखाया।
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malsi deer park
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डीएफओ पीके पात्रों ने बताया कि जू के जानवरों का आधार कार्ड बनाने की शुरुआत हो गई है। अब धीरे-धीरे जू के सभी पशु-पक्षियों का आधार कार्ड बनाया जाएगा।
आधार नंबर से पता चल जाएगा कि जानवर का जन्म कब हुआ? वह कितने साल का है? कौन की बीमारी हुई? किस जू से लाया गया है और उसके माता-पिता कौन हैं? जानवरों के आधार कार्ड से कई फायदे हैं। माइक्रो चिप लगने से जानवरों की हर मूमेंट पर विभाग नजर रख सकता है।