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हरिद्वार: 40 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी, श्राद्ध तर्पण को भी नहीं मिली जगह, तस्वीरें...

Tue, 04 Jun 2019 08:25 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार में गंगा स्नान - फोटो : अमर उजाला
सोमवती अमावस्या पर करीब 40 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। देश के तमाम राज्यों से श्रद्धालुओं से हर की पैड़ी समेत गंगा के तमाम घाट पटे रहे। कहीं तिल रखने को भी जगह नहीं थी। तीन डुबकी लगाने का भी किसी को मौका नहीं मिला। एक डुबकी के बाद ही स्वयंसेवी और पुलिस कर्मियों ने श्रद्धालुओं को गंगा से बाहर निकाल लिया। हर की पैड़ी पर तो आलम यह था कि श्रद्धालुओं के केवल सिर ही सिर नजर आ रहे थे।
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हरिद्वार में गंगा स्नान - फोटो : अमर उजाला
सोमवती अमावस्या पर स्नान के लिए सबसे अधिक भीड़ पंजाब, राजस्थान, जम्मू और उत्तर प्रदेश से पहुंची। दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट आदि तमाम प्रांतों से स्नानार्थियों का तांता दिनभर लगा रहा। दक्षिण भारत से भी काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
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हरिद्वार में गंगा स्नान - फोटो : अमर उजाला
रविवार को चतुर्दशी होते हुए भी अमावस्या का स्नान बीती शाम से ही होने लगा था। घड़ी ने जैसे ही रात के 12 बजाए श्रद्धालुओं का समुद्र स्नान के लिए उमड़ पड़ा। घाटों पर बहुत भारी भीड़ के कारण गंगा के तटों पर अन्य कर्मकांड करने के लिए भी जगह नहीं बची। यही वजह थी कि स्नानार्थियों को हर की पैडी पर एक ही डुबकी लगाने के बाद स्वयं सेवकों एवं पुलिस कर्मियों ने गंगा से बाहर निकाल दिया। उन्हें तीन डुबकी लगाने का भी मौका नहीं मिला। 

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हरिद्वार में गंगा स्नान - फोटो : अमर उजाला
उगते सूर्य को अर्ध्य देने वालों को स्थान न होने से निराशा ही हाथ लगी। बाजारों में भीड़ की वजह से अव्यवस्थाओं का आलम रहा। अमावस्या के दिन बड़, पीपल और स्नान से जुड़े तीन मुख्य पर्व थे। नारायणी शिला पर श्राद्ध के लिए जाने वाले हजारों यात्री यातायात प्रबंधों के कारण पहुंच ही नहीं पाए। न ही कर्मकांड और पितृ शांति कराने वाला कोई पंडित नजर आ रहा था। 
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हरिद्वार में गंगा स्नान - फोटो : अमर उजाला
महिलाओं ने पीपल के वृक्षों की परिक्रमा के बाद उद्यापन भी किए और सुख शैयाओं के दान भी। सोमवती अमावस्या दान का पर्व है, लिहाजा यात्रियों ने संतों और पुरोहितों के स्थानों पर जाकर दानपुण्य भी खूब किया। हर की पैड़ी पर प्रात:कालीन और सायंकालीन आरती का बहुत भव्य नजारा दिखाई दिया। दोपहर के समय ब्रह्मकुंड समेत दर्जनों घाटों पर गंगा मैया को भोग लगाया गया। 
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