पाकिस्तान की पूर्व कप्तान सना मीर ने महिला क्रिकेटरों के खिलाफ लैंगिक भेदभाव और ऑनलाइन नफरत पर चिंता जताई। उन्होंने शाहिद अफरीदी के पुराने विवादित बयान की आलोचना करते हुए कहा कि महिलाओं को उनकी गलतियों पर अनुचित तरीके से निशाना बनाया जाता है। साथ ही एआई वीडियो और झूठे प्रचार को भी खतरनाक बताया।
महिला टी20 विश्वकप 2026 में पाकिस्तान का सफर जीत के साथ खत्म हुआ। टीम ने अपने आखिरी मैच में नीदरलैंड्स को 37 रन से हराया। इस मैच से पहले पाकिस्तान महिला टीम ने चार मैच गंवाए थे और लीग राउंड से ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई ती। इसकी काफी आलोचना हुई थी। हालांकि, अब पाकिस्तानी महिला टीम की पूर्व कप्तान सना मीर ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर पाकिस्तान में महिला क्रिकेटरों की मिलने वाली नफरत का खुलकर खुलासा किया है।
40 साल की सना मीर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए महिला क्रिकेटरों के खिलाफ हो रही नफरत, झूठे प्रचार और लैंगिक भेदभाव पर खुलकर अपनी बात रखी। साथ ही पाकिस्तान के पुरुष क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी को भी उनके एक बयान को लेकर लताड़ लगाई है। आइए जानते हैं सना मीर ने क्या कहा है...
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सना मीर
- फोटो : ICC
'महिला क्रिकेट ने पाकिस्तान को कई यादगार जीत दिलाई'
सना मीर ने कहा,
'आईसीसी टी20 विश्व कप के मौजूदा अभियान पर कहां से बात शुरू करें, समझ नहीं आता। खिलाड़ियों के उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन ने सभी को निराश किया है। लेकिन हमें यह साबित करने में कई साल लगे कि पाकिस्तान में महिला क्रिकेट में बड़े उलटफेर करने की क्षमता है।'
'हमने टी20 विश्व कप में भारत को दो बार हराया है, पहली बार 2012 में और फिर 2016 में। हमने टी20 में स्वर्ण पदक जीते हैं और इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों को भी हराया है।'
'हमारी टीम अच्छी रैंकिंग तक पहुंची, कुछ खिलाड़ियों को आईसीसी हॉल ऑफ फेम में जगह मिली और हमने उपलब्ध हर बड़ी उपलब्धि हासिल की। टीम के ढांचे, घरेलू क्रिकेट और अन्य कमियों पर मैं पहले भी बोलती रही हूं और आगे भी बोलती रहूंगी। लेकिन जिस चीज ने मुझे सबसे ज्यादा दुख पहुंचाया है, वह हमारी सोच है।'
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सना मीर और पाकिस्तान की मौजूदा महिला क्रिकेट टीम
- फोटो : ICC
'महिलाओं की गलतियों पर उनका आत्मविश्वास तोड़ने की कोशिश होती है'
सना मीर ने कहा कि समाज में महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'जब भी महिलाओं या लड़कियों की बात होती है, तो उनके प्रति एक तरह की तिरस्कार भरी सोच दिखाई देती है। अगर उनसे कोई गलती हो जाए तो उनका आत्मविश्वास पूरी तरह तोड़ने की कोशिश की जाती है। जब तक यह सोच नहीं बदलेगी, तब तक हम आगे नहीं बढ़ सकते।'
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए कहा, 'आज ऑस्ट्रेलिया महिला क्रिकेट में शीर्ष पर इसलिए है क्योंकि कई साल पहले वहां के पुरुष क्रिकेटरों ने अपनी महिला खिलाड़ियों को बराबरी का दर्जा दिलाने की मांग की थी। उन्होंने क्रिकेट बोर्ड से महिलाओं के योगदान को सम्मान देने की बात कही थी। यहां तक कि ऑस्ट्रेलियाई पुरुष खिलाड़ियों ने तब तक नए अनुबंधों पर हस्ताक्षर नहीं किए, जब तक उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई।'
सना मीर ने पूर्व पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी के उस विवादित बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं को क्रिकेट की बजाय खाना बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
अफरीदी ने कहा था, 'हमारी महिलाएं बहुत अच्छा खाना बनाती हैं। चीन चाहे जितनी भी तरक्की कर ले, लेकिन क्रिकेट उनके खून में नहीं है।'
अफरीदी ने कहा था, 'हमारी महिलाओं के खून में अच्छा खाना बनाना है, उन्हें उसी पर ध्यान देना चाहिए। जहां तक क्रिकेट का सवाल है, जो भी उन्हें बढ़ावा देना चाहता है, उसे मेरी शुभकामनाएं।'
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पाकिस्तान टीम-शाहिद अफरीदी
- फोटो : ANI
'पुरुष टीम भी हारती है, लेकिन उसके साथ ऐसा व्यवहार नहीं होता'
सना मीर ने कहा कि महिला खिलाड़ियों को सिर्फ उनके जेंडर की वजह से निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग हमारा समर्थन भी करते हैं, लेकिन बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो सिर्फ इसलिए खिलाड़ियों को निशाना बनाते हैं क्योंकि वे महिलाएं हैं। क्या पुरुष टीम ऐसे टूर्नामेंट नहीं हारती? क्या हमने कभी उन्हें इस तरह निशाना बनाया? हम टीवी कार्यक्रमों में बैठते हैं, लेकिन क्या किसी महिला विशेषज्ञ ने कभी कहा कि पुरुषों को तंदूर पर रोटियां बनानी चाहिए?'
'एआई वीडियो और झूठे प्रचार से खिलाड़ियों को निशाना बनाया जा रहा है'
सना मीर ने सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे फर्जी कंटेंट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, 'बात करने का भी एक तरीका होता है और महिलाएं भी इसी देश का हिस्सा हैं। क्या आप महिलाओं को इसी नजरिए से देखते हैं? खिलाड़ियों और उनके परिवारों को निशाना बनाने के लिए एआई से बनाए गए वीडियो तैयार किए जा रहे हैं और झूठा प्रचार फैलाया जा रहा है। यही सोच उत्पीड़न को बढ़ावा देती है और इससे कोई भी सुरक्षित नहीं है।'