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भारत को गुलाबी गेंद से क्रिकेट पर क्यों है ऐतराज?

Tue, 01 Aug 2017 07:52 PM IST
amarujala.com- Presented by: शरद मिश्रा
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डे-नाइट टेस्ट
ऑस्ट्रेलिया,  दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड ने गुलाबी गेंद से दिन रात के टेस्ट मैचों में रूचि दिखाई है लेकिन भारत ने इस ओर अभी तक कोई विशेष पहल नहीं की है। भारत में पिछले साल ग्रेटर नोएडा में गुलाबी गेंद में दलीप ट्राफी के सभी मैचों का आयोजन किया था। 

 
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भारत को गुलाबी गेंद से क्रिकेट पर क्यों है ऐतराज?

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दिलीप ट्रॉफी - फोटो : getty
इसके बाद से बीसीसीआई ने इस दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है। लोधा पैनल की सिफारिश के बाद कानूनी विवाद इसके पीछे की वजह हो सकती है। पूर्व प्रेसीडेंट अनुराग ठाकुर और पूर्व सचिव अनुराग शिर्के ने ने हालांकि इसमें दिलचस्पी दिखाई थी। बाद में इन्हें अपने पद से हटना पड़ा। दलीप ट्राफी के बाद बीसीसीआई ने इस पर किसी खिलाड़ी या कप्तान से इस पर बात नहीं की है।  

 
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पिंक बॉल - फोटो : Wikipedia
गौर हो कि 2007 के दौर में टी-20 को देश में ज्यादा लोकप्रियता नहीं मिली थी लेकिन बाद में भारत में ही आईपीएल के रूप में टी-20 सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ है। गुलाबी गेंद का क्रिकेट भी कहीं इसी तरह बाद में यहां सर्वाधिक लोकप्रिय ना हो जाए। हालांकि अभी इसकी शुरुआत में काफी आशंका के बादल नजर आ रहे हैं। 
 

भारत को गुलाबी गेंद से क्रिकेट पर क्यों है ऐतराज?

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Pink Ball - फोटो : Getty
बोर्ड के एक अधिकारी कहते हैं कि देश में क्रिकेट विभिन्न परिस्थितियों में खेला जाता है। लिहाजा गुलाबी गेंद से यहां क्रिकेट खेल एक मुश्किल कवायद है। वैसे कहा जा रहा है कि गुलाबी गेंद के क्रिकेट का भविष्य अब सौरव गांगुली के हाथों में है। वह अगर आवश्यक समझेंगे तो देश में गुलाबी गेंद से क्रिकेट के मैच करा सकते हैं। गांगुली बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कोलकाता में स्‍थानीय स्तर पर गुलाबी गेंद से क्रिकेट के मैच आयोजित करवा चुके हैं।
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गुलाबी गेंद - फोटो : getty
बोर्ड ने गुलाबी गेंद की ‌निर्माता कंपनियों से भी किसी तरह की बात नहीं की है। इन कंपनियो को पिछले सीजन में काफी अधिक संख्या में गुलाबी गेंद बनाने के लिए कहा गया था। लेकिन‌ अभी तक इन कंपनियों को किसी तरह का आर्डर नहीं दिया गया है।  
 
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दिलीप ट्रॉफी - फोटो : getty
एक बड़ी कंपनी के अधिकारी का कहना है कि पिछले साल हमसे गुलाबी गेंद का निर्माण करने को कहा गया ‌था। हमसे नेशनल क्रिकेट एकेडमी में इसकी आपूर्ति के लिए‌ कहा गया था। इस साल अभी तक हमसे किसी ने चर्चा नहीं की है। 
वर्तमान कोच रवि शास्‍त्री ने पिछले साल गुलाबी गेंद से क्रिकेट के लिए दोपहर से रात 8 बजे तक के समय का सुझाव ‌दिया था। शास्‍त्री का मानना था कि इस अवधि में गुलाबी गेंद से देश में क्रिकेट संभव हो सकता है।
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सौरव गांगुली - फोटो : getty
यह भी कहा जा रहा है कि देश में पिंक बॉल टेस्ट के आयोजन के निर्णय की कमान पूरी तरह टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सौरव गांगुली के हाथों में हैं। बीसीसीआई की टेक्निकव कमेटी का सदस्य होने के नाते यदि उन्हें जरूरत महसूस होती है तो वो इसके लिए दबाव बना सकते हैं। सीएबी के अध्यक्ष के रूप में कोलकाता के एक स्ठानीय क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन गुलाबी गेंद के साथ करा चुके हैं। 
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