सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली
ऐसे बनाया खुद को सर्वश्रेष्ठ
कोहली ने कहा, ‘इतनी ऊर्जा होती थी कि मैं जिम सत्र में हिस्सा ले सका और 35 दिन के थोड़े से समय में 10 मैच खेल सका। मैंने प्रत्येक मैच इसी ऊर्जा से खेला, मुझे कभी भी ऐसा महसूस नहीं हुआ था। मेरे शरीर में कोई खिंचाव नहीं था।’
अपने आदर्श सचिन तेंडुलकर के बतौर क्रिकेटर कौशल को वह सर्वश्रेष्ठ आंकते हैं, जबकि खुद को वह कड़ी मेहनत का नतीजा मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं जानता हूं कि जब मैं आया था तो मैं इतना कौशल रखने वाला खिलाड़ी नहीं था, लेकिन मेरी एक चीज निरंतर रही कि मैं खुद पर काम करता रहा। अगर भारतीय टीम को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम बनना है तो उसे एक निश्चित तरीके से खेलने की जरूरत थी।’