सचिन तेंदुलकर
तेंदुलकर का मानना है कि चयन के समय यो-यो टेस्ट के अलावा अन्य फैक्टर्स का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि फील्डिंग का स्तर चुनौतीपूर्ण होता है। अब मैंने कभी यो-यो टेस्ट नहीं किया। हमारे समय बीप टेस्ट होता था, जो इसके समान ही है। मगर चयन सिर्फ बीप टेस्ट पर निर्भर नहीं रहता था। इसमें फिटनेस और खिलाड़ी की क्षमता का भी ध्यान रखा जाता था। मेरे ख्याल से यो-यो टेस्ट महत्वपूर्ण हैं, लेकिन खिलाड़ी की क्षमता को ध्यान में रखते हुए यह भी देखना चाहिए कि वह कितना फिट या अनफिट है।