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दक्षिण अफ्रीका में मिला टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जीतने का फॉर्मूला नंबर वन, यह रही पूरी थ्योरी

Tue, 27 Feb 2018 07:59 AM IST
एजेंसी
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टीम इंडिया - फोटो : BCCI
टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली की असाधारण बल्लेबाजी, जसप्रीत बुमराह का हर प्रारूप की कसौटी पर खरा उतरना और अगले वर्ष इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप के लिए नए कोर ग्रुप की पहचान। दक्षिण अफ्रीका दौरे में ऐतिहासिक सफलताओं के बीच ये चंद सकारात्मक पहलू हैं, जिसने सात हफ्ते के इस दौरे को और भी कामयाब बना दिया।

लंबे समय के बाद उपमहाद्वीप से बाहर टीम इंडिया उम्मीदों पर इतना खरा उतरी है। तीन में से दो प्रारूपों में सीरीज जीतकर कप्तान कोहली बड़ी प्रशंसा के हकदार हैं। बेशक टेस्ट सीरीज में 1-2 की हार का मलाल रहेगा लेकिन इस बात से कोई असहमत नहीं होगा कि पांच दिवसीय प्रारूप में भी भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को उसके घर में कड़ी टक्कर दी है। वन-डे सीरीज में 5-1 की जीत और टी-20 सीरीज में 2-1 की कामयाबी तो किसी टीम के लिए वापसी की एक मिसाल हो गई है।
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टीम इंडिया - फोटो : BCCI
पांच गेंदबाजों की थ्योरी तैयार  
वन-डे सीरीज में कलाई के स्पिनरों युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव छा गए। दोनों ने छह मैचों में 33 विकेट लिए। साथ ही यह भी साबित किया कि वो सफलता के लिए टर्निंग ट्रैक पर निर्भर नहीं हैं। भुवनेश्वर, हार्दिक पांड्या और बुमराह ने अपनी ऑलराउंड क्षमताओं से विश्व कप की योजना के तहत पांच गेंदबाजों की खोज लगभग पूरी कर दी है। यह भी तय हो गया है कि धोनी विश्व कप 2019 से पहले ग्लव्स टांगने नहीं जा रहे हैं।
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टीम इंडिया - फोटो : bcci
बल्लेबाजी में पहले तीन क्रम पर शिखर धवन, रोहित शर्मा और विराट कोहली पूरी तरह जम चुके हैं। बस नंबर चार, पांच और छह को लेकर खींचतान है। मगर उसके लिए पांच विकल्पों में अच्छी होड़ मची है। अजिंक्य रहाणे 2015 में ऑस्ट्रेलिया में हुए पिछले विश्व कप में सफल रहे थे। हालांकि मिडिल ओवरों में उनकी स्ट्राइक रेट पर सवाल हैं। 

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मनीष पांडे
मनीष पांडे ने भी मौका मिलने पर अपनी प्रतिभा साबित की है। केदार जाधव अच्छे स्ट्रोक प्लेयर हैं, उनकी धीमी गेंदबाजी अतिरिक्त योग्यता मानी जा रही है। श्रेयस अय्यर घरेलू क्रिकेट में अच्छा करते रहे हैं। एक साल बाद टी-20 में सफल वापसी करने वाले सुरेश रैना भी दस्तक दे रहे हैं। सीरीज के तीसरे टी-20 मैन ऑफ द मैच रैना की वापसी की संभावनाएं प्रबल हुई हैं। 
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विराट कोहली - फोटो : BCCI
'किंग' कोहली का रुतबा कायम 
भारतीय बल्लेबाजी टेस्ट मैचों में कसौटी पर ज्यादा खरी नहीं उतरे लेकिन कप्तान कोहली फिर भी अग्रिम मोर्चे से नेतृत्व करते आए। उन्होंने 286 रन बनाए जोकि दक्षिण अफ्रीका सफल बल्लेबाज एबी डीविलियर्स के 211 रन से 75 ज्यादा थे। कोहली ने न तो अपनी आक्रामक कप्तानी के तेवर बदले और न ही हर मैच में अंतिम एकादश बदलने का तरीका बदला। लंबे प्रारूप में इसका ज्यादा फायदा नहीं मिला साथ ही उनका अजिंक्य रहाणे के मुकाबले रोहित शर्मा की काबलियत पर ज्यादा भरोसा करने की नीति की भी आलोचना हुई। 
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विराट कोहली - फोटो : BCCI
रोहित सीमित ओवरों में भी ज्यादा नहीं चले लेकिन किंग कोहली ने तीन शतक लगाकर वन-डे सीरीज में मेजबानों गेंदबाजों के खिलाफ जमकर रन बटोरे। वन-डे सीरीज में 558 रन और 5-1 की जीत कोहली की बड़ी उपलब्धि रही। कोच रवि शास्त्री ने तो यह तक कह दिया कि आपको कोहली की तारीफ के लिए नए शब्दकोश की जरूरत पड़ेगी। टेस्ट सीरीज की हार की निराशा पीछे छूट गई। फाफ डू प्लेसिस की अनुपस्थिति और एबी डीविलियर्स का न चल पाना भी वजह रही लेकिन जिस जूनून से भारतीय खिलाड़ियों ने हर मैच खेला उससे उनका श्रेय छीना नहीं जा सकता। 
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टीम इंडिया - फोटो : BCCI
तीन टेस्ट में 60 विकेट 
भारतीय टीम अपने तेज गेंदबाजों के लिए बहुत ज्यादा नहीं जानी जाती लेकिन इस दौरे में विराट के पेसरों ने भी अपना कमाल दिखाया। तीन टेस्ट मैचों में मोहम्मद शमी ने 15, जसप्रीत बुमराह ने 14, भुवनेश्वर कुमार ने दो मैचों में दस विकेट और इशांत शर्मा ने दो मैचों में आठ विकेट लिए। तीन टेस्ट मैचों में दक्षिण अफ्रीका के गिरे 60 विकेटों में से 47 तेज गेंदबाजों के नाम रहे। 

सेंचुरियन में दूसरे टेस्ट में बल्लेबाजी के अनुकूल विकेट पर मैच हारने के बाद कप्तान विराट कोहली और हेड कोच रवि शास्त्री को बेचैन जरूर किया होगा। उस समय तो बुमराह को टेस्ट मैचों में मौका दिए जाने को लेकर सवाल भी उठने लगे थे लेकिन कप्तान कोहली अपने गेंदबाजों के संग खड़े थे। उन्होंने कहा भी बुमराह हमारे लिए अंतिम एकादश के लिए सही चयन हैं। वो ऐसे गेंदबाज हैं जो जरूरत पड़ने पर ब्रेकथ्रू दिलाते हैं। वो जी-जान लगातार गेंदबाजी करते हैं। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपनी उच्च स्तरीय क्षमता साबित की है।  
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