आज स्वामी विवेकानंद की जयंती है। हर साल विवेकानंद जी की जयंती (12 जनवरी) को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। आध्यात्मिक मार्ग अपनाने के बाद उनको स्वामी विवेकानंद के नाम से जाना जाने लगा। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं का सही मार्गदर्शन करने के लिए सफलता के कई मंत्र दिए, जिन्हें आज भी अपने जीवन में अपना कर लोग सफलता की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं। यदि आप उनके विचारों को अपनाते हैं तो निश्चय ही आपको सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर चलिए जानते हैं उन खिलाड़ियों के बारे में जो बेहद कम उम्र में ख्याति हासिल कर चुके हैं।
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अनहत सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
अनहत सिंह
उम्रः 15 साल
खेलः स्क्वैश
दिल्ली की रहने वाली 15 साल की अनहत सिंह स्क्वैश प्लेयर हैं, जो बर्मिंघम राष्ट्रीय खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अनहत के नाम पर कई उपलब्धियां और पदक हैं। उन्होंने साल 2019 में ब्रिटिश ओपन में स्वर्ण पदक जीता था। वहीं 2020 में ब्रिटिश एंड मलेशिया जूनियर ओपन में रजत पदक हासिल किया था। अनहत सिंह का जन्म 13 मार्च 2008 को दिल्ली में हुआ था। उनके पिता का नाम गुरशरण सिंह हैं जो पेशे से वकील हैं। अनाहत की मां का नाम तानी सिंह है और वह इंटीरियर डिजाइनर हैं। अनाहत इस समय पढ़ाई कर रही हैं। वह 9वीं क्लास की स्टूडेंट हैं। साथ ही एक खिलाड़ी भी हैं। अनाहत ने महज 6 साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। बचपन से ही खेल में रूचि रखने वाली अनाहत ने बाद में स्क्वैश खेलना शुरू किया तो उनका इस खेल के प्रति लगाव बढ़ता गया। अब वह किशोरावस्था में ही देश के लिए पदक जीत रही हैं।
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प्रगनाननंदा
- फोटो : सोशल मीडिया
आर प्रगननानंदा
उम्रः 18 साल
खेलः शतरंज
प्रगनाननंदा 12 साल की उम्र में ही ग्रैंडमास्टर बन गए थे। उनका जन्म 10 अगस्त 2005 को चेन्नई में हुआ था। वह तीन साल उम्र में ही शतरंज से जुड़ गए थे। प्रगनाननंदा के पिता रमेशबाबू बैंक में करते हैं। उन्होंने पोलियो से ग्रसित होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और बच्चों का अच्छे से पालन-पोषण किया। प्रगनाननंदा की बड़ी बहन वैशाली को भी यह खेल पसंद था और उन्हें देखकर ही प्रगनाननंदा ने शतरंज खेलना शुरू किया। प्रगनाननंदा के लिए साल 2018 खास रहा। वह महज 12 साल की उम्र में ही ग्रैंडमास्टर बन गए थे। वह भारत के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने थे। इस मामले में उन्होंने विश्वनाथन आनंद को पीछे छोड़ा था। आनंद 18 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने थे। प्रगनाननंदा दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने थे। उनसे आगे सिर्फ यूक्रेन के सिर्जी कर्जाकिन हैं। वह साल 1990 में सिर्फ 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बन गए थे। पिछले साल वह फिडे विश्वकप शतरंज के फाइनल में हार गए। उन्होंने सेमीफाइनल में दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी फैबियानो कारुआना को हराया था, लेकिन फाइनल में नॉर्वे के मैग्नस कार्लसन की चुनौती को नहीं तोड़ पाए। वह दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी के खिलाफ टाईब्रेकर में हार गए। हालांकि, इस साल वह और भी कई उपलब्धियां अपने नाम करना चाहेंगे।
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तीरंदाज शीतल देवी
- फोटो : डीआईपीआर
शीतल देवी
उम्रः 17 साल
खेलः पैरा तीरंदाजी
विश्व की नंबर- 1 पैरा तीरंदाज शीतल देवी महज 17 साल की उम्र में अर्जुन पुरस्कार जीत चुकी हैं। शीतल ने बिना हाथों के पैरा एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ की रहने वाली शीतल ने यह साबित किया है कि अगर हौसला हो तो बिना भुजाओं के भी तीर निशाने पर लगाए जा सकते हैं। शीतल देवी ने बीते साल चीन में आयोजित चौथे पैरा एशियाई खेलों में तीन स्वर्ण पदक और एक रजत पदक अपने नाम किया। वहीं, 2023 में चेक गणराज्य के पिल्सेन में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में एक रजत पदक पर कब्जा जमाया। वह 2023 में एशिया की सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट चुनी गईं। वर्ल्ड आर्चरी (तीरंदाजी की सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय संस्था) के अनुसार बिना बाजुओं के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी करने वाली शीतल दुनिया की पहली महिला तीरंदाज हैं। शीतल पहली बार सुर्खियों में तब आईं जब उन्होंने इस वर्ष विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में पदक जीता, लेकिन दुनिया की नजरों में वह हांगझोऊ पैरा एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक जीतकर छाईं।
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लक्ष्य सेन
- फोटो : सोशल मीडिया
लक्ष्य सेन
उम्रः 22 साल
खेलः बैडमिंटन
22 साल के लक्ष्य देश के सबसे अहम बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल हो चुके हैं। बड़े से बड़े खिलाड़ियों को हराने की क्षमता रखने वाले लक्ष्य इस साल ओलंपिक में देश के लिए पदक ला सकते हैं। लक्ष्य ने 2021 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में एक स्वर्ण और एक रजत (मिश्रित टीम स्पर्धा) जीता था। लक्ष्य सेन थॉमस कप 2022 में चैंपियन बनने वाली पुरुष टीम के सदस्य थे। उन्होंने 2022 एशियाई खेलों में रजत पदक हासिल किया था। लक्ष्य सेन को बैडमिंटन खेलने का हुनर विरासत में मिला है। उनके दादा स्व. सीएल सेन भी बैडमिंटन की कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं जीत चुके हैं। लक्ष्य सेन के बड़े भाई चिराग सेन भी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। चिराग जूनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप और जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में नंबर दो रह चुके हैं। लक्ष्य सेन अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 26 पदक जीत चुके हैं। इनमें अकेले 16 स्वर्ण पदक हैं।
तितास साधू
उम्रः 19 साल
खेलः क्रिकेट
तितास साधु का जन्म पश्चिम बंगाल के चिनसुरा में हुआ। उनके दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में 93% अंक आए थे। वह अपनी शिक्षा के दौरान रनिंग और स्विंग भी किया करती थीं। तितास साधु के पिता का नाम राणादीप साधु है। वह एक पूर्व एथलीट हैं और अब हुगली में एक क्रिकेट अकादमी चलाते हैं। क्रिकेट साधु की प्राथमिकता नहीं थी। वह अपने पिता रणदीप की तरह एथलीट बनना चाहती थीं। तेज दौड़ के लिए खुद को ट्रेंड कर रही थीं। तितास के पिता एक क्रिकेट एकेडमी चलाते थे। एक दिन एकेडमी बंद थी तब उनके पिता ने उन्हें गेंद फेंकने के लिए कहा। तितास के जीवन का वह पहला दिन था जब उन्होंने क्रिकेट खेला था। यहीं से उन्हें क्रिकेट में रुचि आई और गेंदबाज बनने का ठान लिया।
भारतीय महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम ने "महिला अंडर-19 टी20 विश्व कप" के पहले संस्करण में ही जीत हासिल की थी। खास बात ये है कि, यह भारतीय महिला टीम की किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट में पहली जीत थी। भारत का फाइनल में सामना इंग्लैंड से था। तितास ने इस मैच में अपने नाम का परचम लहरा दिया था। उन्होंने चार ओवर में छह रन देकर दो विकेट झटके थे। इस दौरान तितास को प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड दिया गया। 2024 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में भी तितास ने बेहतरीन गेंदबाजी की और देश को चैंपियन बनाया। अब तितास टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की करने और अपनी गेंदबाजी से कई और मैच जिताना चाहेंगी। वह विश्व कप में भी भारत के लिए अहम खिलाड़ी साबित हो सकती हैं।