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न जीत पर कोई बजाएगा ताली, न देगा कोई ऐसी गाली, यह था 'कैप्टन कूल' की जीत का फंडा

Sun, 22 Jul 2018 11:22 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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dhoni virat ravi
टीम इंडिया के कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत दो बार विश्व चैंपियन बना है। करीब एक दशक तक टीम की कमान संभालने वाले धोनी ने मैदान पर हमेशा अपने साथी खिलाड़ियों को संयम बनाए रखने की सलाह दी है। भरत सुंदरेशन की किताब में धोनी के बारे में खुलासा हुआ है कि उन्होंने हमेशा अपने साथी खिलाड़ियों को मां-बहन की गाली निकलाने से मना किया है।
 
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एमएस धोनी
बता दें कि साल 2008 में धोनी की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया का पहला विदेशी दौरा था। उस वक्त ऑस्ट्रेलियाई टीम अपने आक्रामक रवैये  के लिए पूरी दुनिया में मशहूर थी। इसकी एक वजह यह भी थी कि ऑस्ट्रेलिया 1999 से लगातार तीसरी बार विश्व चैंपियन बनी थी।
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एमएस धोनी और टिम पेन
नंबर एक पोजीशन पर रहने का घमंड ऑस्ट्रेलिया पर इस कदर हावी था कि वो दूसरी टीम के साथ कभी ढंग से नहीं पेश आते थे। लेकिन अपने पहले ही दौरे में धोनी ने अपने खिलाड़ियों को कंगारुओं पर निजी छींटाकशी करने से इनकार किया था।

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VIRAT DHONI
धोनी के एक करीबी दोस्त ने किताब के माध्यम से बताया, 'धोनी अपनी स्टाइल में गोली मारते हैं। धोनी का मानना था कि अगर वो अपने खिलाड़ियों को मां-बहन की गाली देने की छूट दे देते तो उनका खेल नहीं बल्कि उनकी बातें विरोधियों को परेशान करती।
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हरभजन सिंह और एमएस धोनी
आखिरकार धोनी की रणनीति बिल्कुल सही साबित हुई। 2008 में धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया से वीबी सीरीज जीती। इसके बावजूद धोनी ने टीम के खिलाड़ियो को जीत का जश्न मनाने से इनकार किया था।
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MS Dhoni
दरअसल दूसरे फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई टीम को महज 160 रनों पर सिमटाने के बाद धोनी रोहित शर्मा के साथ क्रीज पर बल्लेबाजी कर रहे थे। उस वक्त धोनी ने एक संदेश पवेलियन में बैठे खिलाड़ियों को भेजा।
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dhoni
धोनी ने इस मैसेज में कहा, 'फाइनल में हमारी जीत जश्न बालकोनी में खड़े होकर कोई नहीं मनाएगा। माही ऑस्ट्रेलियाई टीम को ये संदेश देना चाहते थे कि उन्हें हराना कोई बड़ी बात नहीं है। अगर हम जीत का ज्यादा जश्न मनाते तो ऑस्ट्रेलियाई टीम को लगता कि ये एक उलटफेर हुआ है। हम उन्हें ये जताना चाहते थे कि ये तुक्का नहीं है। ये आगे भी होता रहेगा'
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