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आखिर क्यों नहीं ले रहे हैं धोनी संन्यास, क्या होगा इन खिलाड़ियों जैसा हाल?

Tue, 24 Sep 2019 04:44 PM IST
Rohit Ojha स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एम एस धोनी - फोटो : social Media
भारतीय क्रिकेट में संन्यास एक पहेली की तरह है। यहां कोई खिलाड़ी तय ही नहीं कर पाता है कि अपने क्रिकेटिंग करियर पर कब विराम लगाना है। टीम इंडिया में जहां कुछ खिलाड़ियों ने अपने करियर के उफान पर रहते ही सही समय भांपकर संन्यास का फैसला लिया, जबकि कुछ खिलाड़ी इस बारे में फैसला लेने के लिए जूझते दिखे।

महेंद्र सिंह धोनी के भविष्य पर जारी दुविधा ने एक बार फिर इस बहस को छेड़ दिया है कि, भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में से एक कब क्रिकेट को अलविदा कहेगा। 38 साल के धोनी पिछले दो महीने से टीम के साथ नहीं हैं और नवंबर से पहले उनके टीम के साथ जुड़ने पर भी संशय बरकरार है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास को लेकर अब तक धोनी की ओर से कुछ नहीं कहा गया है।
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एम एस धोनी - फोटो : social Media
बीसीसीआई के एक सूत्र के अनुसार धोनी बांग्लादेश के दौरे के लिए भी उपलब्ध नहीं होंगे। सूत्र के हवाले से बताया गया कि बीसीसीआई में हम सीनियर और ए टीम के क्रिकेटरों के लिए 45 दिन पहले मैचों (अंतररराष्ट्रीय और घरेलू) की तैयारी कर लेते हैं। जिसमें प्रशिक्षण, डोपिंग रोधी कार्यक्रम से जुड़ी चीजे शामिल हैं। यह पता चला है कि मंगलवार से शुरू हो रही विजय हजारे ट्रॉफी में भी धोनी झारखंड के लिए नहीं खेलेंगे। दिग्गज सुनील गावस्कर ने हाल ही में एक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा था कि, ‘मुझे लगता है वह खुद ही यह फैसला कर लेंगे। हमें धोनी से आगे के बारे में सोचना चाहिए। कम से कम वह मेरी टीम का हिस्सा नहीं होंगे।
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Sunil Gavaskar - फोटो : social Media

गावसकर ने सही समय पर लिया था फैसला

गावस्कर को एक क्रिकेटर के तौर पर सीधे स्पष्ट तौर पर बोलने के लिए जाना जाता है। बात जब संन्यास की आती है, तो गावसकर ने यह फैसला बेहतरीन तरीके से किया था। गावस्कर ने चिन्नास्वामी स्टेडियम की टर्न लेती पिच पर अपने अंतिम टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ 96 रन बनाए थे। गावस्कर 1987 में 37 साल के थे, लेकिन अपनी शानदार तकनीक के दम पर 1989 के पाकिस्तान दौरे तक खेल सकते थे। वह इस खेल को अलविदा कहने की कला को अच्छी तरह से जानते थे। उन्हें पता था कि अच्छे प्रदर्शन के बाद भी वह इस खेल का लुत्फ नहीं उठा पा रहे हैं।

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कपिल देव - फोटो : getty

कपिल देव संघर्ष करते दिखे थे

दिवंगत विजय मर्चेंट ने एक बार कहा था कि खिलाड़ी को संन्यास के फैसले के बारे में सतर्क रहना चाहिए। उसे वैसे समय संन्यास लेना चाहिए जब लोग पूछे ‘अभी क्यों’, ना कि तब जबकि लोग यह पूछने लगे कि ‘कब’। हर महान क्रिकेटर हालांकि गावस्कर की तरह इस कला में माहिर नहीं रहा। भारत के महान क्रिकेटरों में शुमार कपिल देव पर 1991 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर उम्र का असर साफ दिख रहा था। कपिल विश्व रिकॉर्ड के करीब थे, लेकिन उनकी गति में कमी आ गई थी और वह लय में भी नहीं थे।

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जवागल श्रीनाथ - फोटो : सोशल मीडिया

कपिल की वजह से श्रीनाथ को करना पड़ा तीन वर्ष इंतजार

तत्कालीन कप्तान अजहरूद्दीन उनसे कुछ ओवर कराने के बाद स्पिनरों को गेंद थमा देते थे। उस समय भारतीय क्रिकेट में सबसे तेज गति से गेंदबाजी करने वालों में से एक जवागल श्रीनाथ को कपिल के टीम में होने के कारण तीन साल तक राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिला था। क्रिकेट को अलविदा कहने की तैयारी कर रहे एक खिलाड़ी ने कहा कि आप 10 साल की उम्र में खेलना शुरू करते हैं, 20 साल की उम्र में पदार्पण करते हैं और 35 साल की उम्र तक खेलते हैं। आप अपनी जिंदगी के 25 साल सिर्फ एक चीज को दे देते हैं। आप पैसे कमाते हैं, आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी होती है और अचानक से आपको ऐसा फैसला करना होता है, जिससे आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है।

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सौरव गांगुली और एमएस धोनी

गांगुली टॉप पर रहते हुए विदा हुए

गावस्कर ने यह फैसला शानदार तरीके से किया,जबकि कपिल ने लंबे समय तक करियर को खींचने की कोशिश की। पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली के लिए टेस्ट क्रिकेट में आखिरी के दो साल शानदार रहे। उन्होंने 2008 के ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले संन्यास की घोषणा कर दी, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि चयनकर्ता उन्हें एक बार फिर टीम से बाहर करें।

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राहुल द्रविड़

द्रविड़ ने भी शान से लिया संन्यास

धोनी की सलाह पर राहुल द्रविड़ और गांगुली को एकदिवसीय टीम से बाहर किया गया, लेकिन 2011 में टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन कर द्रविड़ ने एकदिवसीय टीम में जगह बनाई। द्रविड़ ने हालांकि घोषणा कर दी कि यह उनकी आखिरी एकदिवसीय सीरीज होगी। इसके छह महीने बाद ऑस्ट्रेलिया में खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया।

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सचिन तेंदुलकर - फोटो : सोशल मीडिया

सचिन, सहवाग और गंभीर भी शानदार

सचिन तेंडुलकर के लिए हालांकि मामला बिल्कुल अलग था। वह शतक नहीं बना पा रहे थे, लेकिन बल्ले से ठीक-ठाक योगदान दे रहे थे। वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर भी उन खिलाड़ियों में शामिल रहे जिन्हें यह समझने में थोड़ा समय लगा कि भारतीय टीम में उनका समय खत्म हो गया। इसमें कोई शक नहीं कि महेंद्र सिंह धोनी ने लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा कि है लेकिन पर्दे पर धोनी का किरदार निभाने वाले सुशांत सिंह राजपूत का एक संवाद है ‘हम सभी सेवक हैं और राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।’ धोनी को शायद इसका मतलब समझना होगा।

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