फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राहुल द्रविड़ ने सुनाई आपबीती, 22 साल बाद किया टीम से बाहर होने का दर्द साझा

Sat, 18 Jul 2020 02:07 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
राहुल द्रविड़ - फोटो : सोशल मीडिया
भारतीय क्रिकेट इतिहास में 'संकटमोचक' शब्द सुनते ही राहुल द्रविड़ की तस्वीर जेहन में तैरने लगती है। चाहे वन-डे क्रिकेट हो या फिर टेस्ट मैच 'जैमी' हर बार टीम को विपरित हालातों से निकालने का काम करते। हर वो जिम्मेदारी संभालते जो उन्हें सौंपी जाती, लेकिन क्या आप जानते हैं तीसरे क्रम पर खेलने वाले सर्वकालिक महान बल्लेबाजों की सूची में शूमार राहुल द्रविड़ भी कभी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। यह भी पढ़ें: संन्यास के बाद कपिल देव ने बदली द्रविड़ की जिंदगी, वरना आज कर रहे होते कुछ और ही काम
विज्ञापन

2 of 5
राहुल द्रविड़ - फोटो : ट्विटर
हाल ही में भारतीय महिला टीम के कोच और पूर्व क्रिकेटर डब्ल्यूवी रमन के यूट्यूब चैनल 'इनसाइड आउट' पर इस महान बल्लेबाज ने अपने करियर के उस 'बुरे दौर' पर भी बात की। बकौल द्रविड़, '1998 में मुझे वन-डे क्रिकेट से बाहर कर दिया गया था। मुझे अपनी वापसी के लिए संघर्ष करना पड़ा था। मैं तब एक साल तक भारतीय क्रिकेट से बाहर रहा था। मैं सोचने लगा था कि क्या वाकई मैं वन-डे क्रिकेट खेलने लायक हूं भी या नहीं।'
विज्ञापन

3 of 5
राहुल द्रविड़
द्रविड़ का वन-डे फॉर्मेट में भी स्ट्राइक रेट धीमा था। इस कारण उन्हें टीम से बाहर किया गया। इस पूर्व कप्तान ने कहा, 'मैं एक टेस्ट खिलाड़ी ही बनना चाहता था। मेरी कोचिंग टेस्ट खिलाड़ी वाली होती थी। तब हमें यही सिखाया जाता था कि गेंद पर ग्राउंड शॉट ही मारना है, उसे हवा में नहीं मारना। तब आपको चिंता होती है कि क्या आप इस फॉर्मेट (वन-डे) में भी खुद को साबित कर पाएंगे।'

4 of 5
राहुल द्रविड़
24000 से ज्यादा इंटरनेशनल रन बनाने वाले इस बल्लेबाज ने कहा, 'भारत में एक क्रिकेटर बनना आसान नहीं था। तब हमारे जमाने में सिर्फ रणजी ट्रॉफी होती थी और भारतीय टीम थी। आईपीएल नहीं था और रणजी ट्रॉफी में भी जो पैसा मिलता था वह बहुत कम ही होता था। चुनौतियां भी कड़ी हुआ करती थीं और क्रिकेट चुनने के बाद बड़े स्तर पर पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। मैं पढ़ाई में भी बुरा नहीं था और क्रिकेट के अलावा कुछ भी आराम से कर सकता था।'
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
राहुल द्रविड़
भारत के लिए 164 टेस्ट (13,288 रन) और 344 वन-डे इंटरनेशनल मैच (10,889 रन) खेलने वाले राहुल द्रविड़ की माने तो अगर वह क्रिकेट में आगे नहीं बढ़ पाते तो कुछ और करने के लिए भी नहीं बचते। तमाम विपरित हालातों को पार करते हुए द्रविड़ ने वन-डे में दमदार वापसी की और 1999 वर्ल्ड कप में जमकर रन बनाए, वह उस विश्व कप में भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें