भारतीय क्रिकेट इतिहास में टीम इंडिया का सर्वश्रेष्ठ कप्तान कौन है सौरव गांगुली या महेंद्र सिंह धोनी। लोग अपने-अपने हिसाब से दोनों में किसी एक का चयन करेंगे। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों बेजोड़ कप्तानों का जन्म एक दिन के अंतराल में हुआ है, यानी की जुलाई की 7 तारीख को धोनी तो 8 को गांगुली ने धरती पर पहली बार कदम रखा। कल ही धोनी 35 के हो गए तो आज दादा का जन्मदिन है और वह 44 साल के हो गए हैं।
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हैप्पी बर्थडे दादाः वो 5 लम्हें जो गांगुली के लिए हैं बेहद खास
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सौरव गांगुली
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टीम इंडिया को अपनी कप्तानी में चरम पर पहुंचाने का श्रेय निश्चित तौर पर महेंद्र सिंह धोनी को जाता है। लेकिन प्रशंसकों से लेकर क्रिकेट पंडित तक, सभी मानते हैं कि टीम को जीत तक ले जाने का जज्बा सौरव गांगुली से मिला। आज उन्होंने अपनी जिंदगी का 44वां पड़ाव पार कर लिया है।
दादा अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेलते हैं लेकिन मैदान के बाहर बतौर क्रिकेट प्रशासक अपनी दमदार छवि दिखा रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण के साथ टीम इंडिया का नया कोच (अनिल कुंबले) के रूप में चुना था। आक्रामक कप्तानी करने में माहिर गांगुली ने न सिर्फ अपने खिलाड़ियों में जोश भरा बल्कि टीम को दुनिया के किसी भी मैदान पर जीत हासिल करने का जज्बा दिया।
आइए, आज हम 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' के उन पांच बेहद यादगार क्षणों को याद करते हैं, जिसमें उनकी अगुवाई में टीम इंडिया ने कई नायाब जीत हासिल की और सौरव को सबका दादा बना दिया।
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सहारा कप में पाकिस्तान को पीटा
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सौरव गांगुली
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सहारा कप में पाकिस्तान को पीटा
कनाडा में 1996-98 के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच पांच-पांच वनडे मैचों की द्विपक्षीय सीरीज सहारा कप खेला गया था। सहारा कप के दूसरे संस्करण (1997) में गांगुली ने अपनी अगुवाई में भारत को 4-1 से जोरदार जीत दिलाई थी।
इस सीरीज में पांच मैन ऑफ द मैच खिताब भारत को मिले। इनमें से चार कप्तान गांगुली के खाते में आए। सीरीज के दूसरे मैच में गांगुली ने अपने वनडे करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 10 ओवर में 16 रन देकर चार विकेट झटके थे।
लॉर्ड्स में उतारी टी-शर्ट, आक्रामकता दिखाई
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लॉर्ड्स में उतारी टी-शर्ट, आक्रामकता दिखाई
अपनी आक्रामक कप्तानी का लोहा मनवा चुके सौरव गांगुली ने लॉर्ड्स में भी जमकर जलवा दिखाया। 2002 में टीम इंडिया इंग्लैंड के दौरे पर थी और लॉर्ड्स में नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल मैच खेला जा रहा था। 326 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरे भारत के लिए युवराज सिंह और मुहम्मद कैफ ने यादगार प्रदर्शन करते हुए टीम को जीत दिलाई।
उसी समय लॉर्ड्स की बॉलकनी में मैच देख रहे गांगुली ने जीत के बाद उत्साह में टी-शर्ट निकाल कर हवा में लहरा दिया। उन्होंने ऐसा एंड्रयू फ्लिंटॉफ को सबक सीखाने के लिए किया था। फ्लिंटॉफ ने भारत दौरे पर मैदान में टी-शर्ट निकाल कर हवा में लहराई थी।
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ईडेन गार्डंस में थामा कंगारुओं का अजेय विजयी रथ
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ईडेन गार्डंस में थामा कंगारुओं का अजेय विजयी रथ
ऑस्ट्रेलियाई टीम 2000-2001 में टेस्ट क्रिकेट में लगातार 15 मैच जीतकर विजयी रथ पर सवार थी। कंगारू टीम का अगला दौरा भारत का था। तीन मैचों की सीरीज में स्टीव वॉ की अगुवाई में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने मुंबई में पहला टेस्ट आसानी से जीतकर सीरीज में बढ़त बना ली थी और ऐसा लग रहा था कि कोलकाता में ईडेन गार्डंस में भी आसानी से जीत हासिल कर लेंगे।
लेकिन कोलकाता के ईडेन गार्डंस में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के रिकॉर्डतोड़ साझेदारी के दम पर पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए भारत ने यह मैच जीत लिया। इसके बाद भारत ने चेन्नई टेस्ट भी जीतकर सीरीज 2-1 से अपने नाम कर लिया। कोलकाता टेस्ट जीतकर गांगुली की टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया के लगातार 16 जीत का रिकॉर्ड को तोड़ा।
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1998 में मिली ढाका की वो ऐतिहासिक जीत
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1998 में मिली ढाका की वो ऐतिहासिक जीत
1998 में ढाका में हुए इंडिपेंडेंस कप में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को पीटकर खिताबी जीत हासिल करना। बांग्लादेश की आजादी के 25 साल पूरे होने पर आयोजित इस टूर्नामेंट के तीन मैचों के फाइनल में भारत और पाक आमने-सामने थे। पहला मैच भारत ने आठ विकेट से जीत लिया।
दूसरा मैच पाक के नाम रहा जिसने भारत को इस मैच में छह विकेट से हरा दिया और चैंपियन टीम का फैसला तीसरे मैच से होना था। निर्णायक जंग में पाक ने पहले बल्लेबाजी करते हुए संशोधित 48 ओवर में 314 रन बनाए। भारत को 48 ओवर में ही 315 रन बनाने थे और उसने एक गेंद शेष रहते 316 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया।
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2003 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा भारत
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2003 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा भारत
सौरव गांगुली की अगुवाई में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2003 के वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई। हालांकि, खिताबी जंग में भारत को ऑस्ट्रेलियाई चुनौती के आगे पस्त होना पड़ा।
1983 में पहली बार वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने के बाद भारत 20 साल बाद फाइनल में पहुंचा था। कप्तानी के अलावा गांगुली बतौर बल्लेबाज भी खासे सफल रहे और तीन शतकों की मदद से 465 रन बनाए।