भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने शुभमन गिल की कप्तानी की तारीफ करते हुए कहा कि उनका सबसे प्रभावशाली बदलाव गेंदबाजों के कप्तान के रूप में उभरना है। गंभीर ने कहा कि गिल को ड्रेसिंग रूम में काफी सम्मान मिलता है और कप्तानी संभालने के बाद उनके प्रदर्शन में भी सुधार हुआ है।
भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे में 406 रन के लक्ष्य का सफल पीछा करने के बाद कप्तान शुभमन गिल की जमकर तारीफ की। गंभीर ने कहा कि गिल के नेतृत्व में सबसे प्रभावशाली बदलाव यह है कि वह अब ‘बॉलर्स के कप्तान’ बनते जा रहे हैं। उनके मुताबिक, गेंदबाजों की मुश्किलों को समझना और उनका भरोसा जीतना कप्तान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी के साथ गंभीर ने युवा तेज गेंदबाजों औकिब नबी और गुरनूर बराड़ को मुश्किल परिस्थितियों में उतारने के फैसले का भी बचाव किया।
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गंभीर
- फोटो : Ani
'रिकॉर्ड की बात नहीं करूंगा, जिम्मेदारी लेना बड़ी बात'
गिल ने दूसरे वनडे में नाबाद 223 रन की पारी खेलकर भारत को 406 रन का लक्ष्य हासिल कराने में अहम भूमिका निभाई। भारत ने इस जीत के साथ तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। गिल की 223 रन की पारी पुरुष वनडे क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक भी बन गई, जो उन्होंने 117 गेंदों में पूरा किया।
हालांकि गंभीर ने गिल के रिकॉर्ड के बजाय उनकी कप्तानी और जिम्मेदारी लेने की क्षमता को ज्यादा महत्वपूर्ण बताया। गंभीर ने कहा कि जब कोई खिलाड़ी दो प्रारूपों में कप्तान बनता है तो अक्सर उसके प्रदर्शन पर असर पड़ने की आशंका रहती है, लेकिन गिल के मामले में ऐसा नहीं हुआ। इंग्लैंड में कप्तानी संभालने के बाद से उनका प्रदर्शन और बेहतर हुआ है।
उन्होंने कहा कि गिल ने न केवल सफेद गेंद के क्रिकेट में बल्कि लाल गेंद के क्रिकेट में भी विकास किया है। गंभीर के मुताबिक, गिल को ड्रेसिंग रूम में काफी सम्मान मिलता है और खिलाड़ी उनकी बात सुनते हैं।
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रोहित और गिल
- फोटो : BCCI
'सबसे प्रभावशाली बात, वह बॉलर्स के कप्तान बन रहे हैं'
गंभीर ने गिल की कप्तानी की सबसे खास बात बताते हुए कहा कि वह धीरे-धीरे गेंदबाजों के कप्तान बन रहे हैं। उन्होंने कहा, 'सबसे प्रभावशाली बात यह है कि वह बॉलर्स के कप्तान बन रहे हैं। वह जानते हैं कि इस फॉर्मेट में गेंदबाजों के लिए कितना मुश्किल होता है। जब आप ऐसा करते हैं तो ड्रेसिंग रूम में हमेशा सम्मान हासिल करते हैं।' गंभीर का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने गुवाहाटी में वनडे क्रिकेट के इतिहास के सबसे बड़े सफल रन चेज में से एक को अंजाम दिया। भारत ने वेस्टइंडीज के 405 रन के जवाब में 406 रन बनाकर मैच अपने नाम किया।
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सुनील गावस्कर
- फोटो : ANI
गावस्कर ने गिल की तुलना ब्रैडमैन से की
भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने भी गिल की पारी और उनके दबाव में संयम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि गिल ने जिस तरह 406 रन के लक्ष्य का पीछा किया, वह शानदार था। गावस्कर ने इसे कप्तान की पारी बताते हुए कहा कि गिल अंत तक क्रीज पर रहकर मैच खत्म करना चाहते थे। उन्होंने गिल के बल्लेबाजी रवैये की तुलना महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन से की। गावस्कर के मुताबिक, ब्रैडमैन हर गेंद को ऐसे खेलते थे जैसे वह शून्य पर हों और वह गेंद उनकी पहली गेंद हो। उन्हें गिल में भी इसी तरह का नजरिया दिखाई देता है। यही वजह है कि गिल दबाव में भी जोखिम कम लेते हुए कई तरह के शॉट खेलने में सक्षम हैं।
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गुरनूर बराड़
- फोटो : ANI
युवा गेंदबाजों को मुश्किल हालात में खिलाने का फैसला
गंभीर ने तेज गेंदबाज आकिब नबी और गुरनूर बराड़ को दबाव वाले मुकाबले में मौका देने के फैसले को भी सही ठहराया। उन्होंने कहा कि 2027 वनडे विश्व कप की तैयारी के लिए युवा खिलाड़ियों को सिर्फ कम दबाव वाले मैचों में खिलाना पर्याप्त नहीं है।
गुरनूर ने गुवाहाटी में 10 ओवर में 96 रन देकर दो विकेट लिए। वहीं औकिब नबी ने अपना वनडे डेब्यू किया और 8.5 ओवर में 84 रन दिए। यह वनडे डेब्यू पर किसी भारतीय गेंदबाज द्वारा दिए गए सबसे ज्यादा रन हैं। उन्होंने 1975 में लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ करसन घावरी के 83 रन के आंकड़े को पीछे छोड़ा।
गंभीर ने कहा कि औकिब को इस मैच में इसलिए मौका दिया गया क्योंकि यह मुकाबला डेड रबर नहीं था। भारत सीरीज में 1-0 से आगे था और जीत के लिए दबाव मौजूद था। उनके मुताबिक, अगले मैच में मौका देने पर वैसा दबाव नहीं होता, जैसा सीरीज जीतने की स्थिति में होता है।
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शुभमन गिल-गौतम गंभीर
- फोटो : PTI
'विश्व कप में सिर्फ दबाव अलग होगा'
गंभीर ने कहा कि विश्व कप में भी क्रिकेट का खेल नहीं बदलेगा, बल्ला और गेंद वही होंगे, लेकिन दबाव अलग स्तर का होगा। इसलिए युवा गेंदबाजों को अभी से कठिन परिस्थितियों का अनुभव देना जरूरी है। उन्होंने गुरनूर का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआती 10 ओवर और डेथ ओवरों में गेंदबाजी करना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव है। आंकड़े भले ही उनके पक्ष में नहीं रहे हों, लेकिन कठिन परिस्थितियों में जितना अधिक वह गेंदबाजी करेंगे, उतना ही भारतीय क्रिकेट को फायदा होगा।
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गंभीर और शुभमन गिल
- फोटो : IANS
गुवाहाटी की पिच पर गंभीर ने उठाए सवाल
भारत की शानदार जीत के बावजूद गंभीर ने गुवाहाटी की पिच को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मुकाबले में गेंद और बल्ले के बीच पर्याप्त प्रतिस्पर्धा नहीं थी। उन्होंने कहा, 'अगर मैं बिल्कुल ईमानदारी से कहूं तो गेंद और बल्ले के बीच थोड़ा और मुकाबला होना चाहिए। यह क्रिकेट नहीं, सिर्फ बल्लेबाजी है।'
गंभीर के मुताबिक, जब एक युवा गेंदबाज ऐसी पिच पर गेंदबाजी करता है और विपक्षी टीम 400 रन बनाती है, फिर दूसरी टीम भी 400 रन का पीछा कर लेती है, तो यह दर्शकों और रिकॉर्ड के लिहाज से शानदार हो सकता है, लेकिन गेंदबाजों के लिए यह उचित नहीं है।
दो नई गेंद और पांच फील्डर की पाबंदी पर भी सवाल
गंभीर ने वनडे क्रिकेट के मौजूदा नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि पांच फील्डरों का 30 गज के घेरे के अंदर रहना, दो नई गेंदों का इस्तेमाल और आधुनिक बल्लेबाजों की पावर हिटिंग गेंदबाजों के विकल्प सीमित कर देती है। उन्होंने कहा कि केवल गेंदबाज के आंकड़ों को देखकर उसका आकलन नहीं करना चाहिए। यह देखना जरूरी है कि उसने अपनी योजना को कितनी अच्छी तरह लागू किया।
गंभीर ने आकिब नबी के डेब्यू का उदाहरण देते हुए कहा कि पहली ही पारी में उन्हें समर्थन और अतिरिक्त गुंजाइश देने की जरूरत है। उनके मुताबिक, इस मैच में किसी भी गेंदबाज के लिए ज्यादा मदद उपलब्ध नहीं थी। भारत अब शनिवार को न्यू चंडीगढ़ के नए पीसीए स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरा और अंतिम वनडे खेलेगा। गिल के पास अपनी कप्तानी में सीरीज को 3-0 से जीतने का मौका होगा।