टीम इंडिया के पूर्व महानतम लेग स्पिनर अनिल कुंबले मंगलवार 17 अक्टूबर को 47 साल के हो गए। कुंबले कभी हार नहीं मानने वाले खिलाड़ियों में शुमार हैं। उन्होंने टेस्ट में 619 तथा वन डे 337 विकेट लिए हैं। टीम इंडिया की ओर से यह टेस्ट और वन डे में रिकॉर्ड है। देश के सबसे महान और रिकॉर्डधारी गेंदबाज कुंबले के करियर से जुड़ी बड़ी यादें हम इस स्लाइड में शेयर कर रहे हैं।
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1993 में हीरो कप में 12 रन देकर 6 विकेट लिए
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हीरो कप 1993
- फोटो : the telegraph
हीरो कप के फाइनल में कोलकाता के ईडन गार्डन में वेस्टइंडीज के खिलाफ 10 ओवर में महज 12 रन देकर 6 विकेट झटक टीम इंडिया को जीत दिलाई। 21 साल तक यह किसी एक मैच में किसी भारतीय द्वारा सर्वाधिक विकेट लेने का रिकॉर्ड रहा। 2014 में स्टुअर्ट बिन्नी ने बांग्लादेश के खिलाफ 4 रन देकर 6 विकेट लेते हुए यह रिकॉर्ड तोड़ा।
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2002 में जबड़ा टूट जाने के बाद भी खेले
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कुंबले
वेस्टइंडीज दौरे पर एंटीगुआ टेस्ट के दौरान बाउंसर से जबड़ा टूट जाने के बावजूद टीम की जरूरत को देखते हुए अनिल कुंबले ने अगले दिन चेहरे पर पट्टी बांधकर बल्लेबाजी की और 14 ओवर की गेंदबाजी में वेस्टइंडीज के सबसे मजबूत बैट्समैन ब्रायन लारा का विकेट हासिल किया। उनके करियर का यह एक यादगार पल रहा।
एक पारी में पाक के 10 विकेट झटके
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कुंबले
- फोटो : oneindia
दाएं हाथ के लेग स्पिनर अनिल कुंबले अंतिम क्षणों तक हार नहीं मानते थे। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 7 फरवरी 1999 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में जो कमाल किया था वह काफी लंबे समय तक याद रखा जाएगा। कुंबले ने दिल्ली के दूसरे टेस्ट में पाक की दूसरी पारी में उसके सभी 10 बल्लेबाजों को अपनी फिरकी का शिकार बनाया था। कुंबले ने देश को कई यादगार जीत दिलाई थी लेकिन इस तरह के हैरतअंगेज प्रदर्शन से पाक को जो पटखनी मिली उसका जिक्र हमेशा किया जाएगा। पूरी पारी में कुंबले ने 26.3 ओवर में 9 मेडन के साथ 74 रन देते हुए 10 विकेट लिए। मैच में हालांकि वह 14 विकेट लिए।
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दिल्ली में तो कुंबले ने कर दिया था कमाल
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कुंबले
अनिल कुंबले जब 9 विकेट हासिल कर चुके थे तो टीम इंडिया का हर सदस्य चाह रहा था कि अंतिम विकेट भी कुंबले को ही मिले और इतिहास बन जाए। श्रीनाथ इस दौरान विकेट से बाहर गेंदबाजी कर रहे थे ताकि कुंबले को यह दुर्लभ उपलब्धि हासिल हो सके। वहीं पाक बल्लेबाज वसीम अकरम और वकार यूनिस की अंतिम जोड़ी मैदान में थी। इस बीच वकार वसीम से कहते सुने गए कि रन आउट हो जाते हैं तो यह परफेक्ट 10 का रिकॉर्ड नहीं बनेगा।
टीम इंडिया में एक दौर सिर्फ अनिल कुंबले का कहलाता था। 1993 से लेकर 2003 तक करीब दस साल कुंबले भारत के मैच विनर गेंदबाज रहे। जब कभी टीम इंडिया किसी मैच में मुश्किल परिस्थिति में फंसती दिखती तुरंत कुंबले को गेंद दी जाती और टीम इंडिया मैच में वापसी कर लेती। कुंबले को टीम इंडिया के साथी 'जंबो' कहकर पुकारते थे। 1997 के टाइटन कप में तो कुंबले ने शानदार गेंदबाजी कर अकेले दक्षिण अफ्रीका को करारी मात दी थी।