धोनी की पुणे सुपरजाइंट्स और गांगुली की पुणे वारियर्स के बीच पांच ऐसी समानताएं जो टूर्नामेंट में दोनों को जल्दी बाहर कर गई।
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दादा और माही की पुणे में 5 लिंक, जो बनी हार की वजह
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पहले पुणे वारियर्स नाम से जानी जाती थी, जिसकी कमान सौरव गांगुली के हाथों में थी। लेकिन अब महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में पुणे सुपरजाइंट्स हो चुकी है। जानते हैं, दोनों टीमों के बीच की 5 खास समानताएं।
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कप्तानी में दादा और माही दोनों फेल
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साल 2012 में पुणे वारियर्स की कप्तानी युवराज सिंह से पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को दी गई। 2008 में रिटायर ले चुके
गांगुली का टी-20 में प्रदर्शन बेहद ढ़ीला रहा। उन्होंने 17.86 के औसत से 15 आईपीएल मैचों में महज 268 रन ही बनाए। वहीं, इस सीजन महेंद्र सिंह धोनी को राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स की कमान मिली। धोनी भी बतौर कप्तान फ्लॉप साबित हुए। उन्होंने 30.28 के औसत से रन बनाए। अपने पिछले मैच में माही को रन लेने के लिए कड़ा संघर्ष भी करना पड़ा। केकेआर के खिलाफ उन्होंने 22 गेंदों में 8 रन ही बनाए।
बल्लेबाजों ने दोनों को निराश किया
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पुणे वारियर्स के कप्तान सौरव गांगुली ही नहीं टीम के बल्लेबाज भी मैदान में अपनी हनक दिखाने में नाकाम रहे। धोनी के साथ भी यही हुआ। बल्लेबाजों ने निराश किया, सिर्फ दोनों कप्तानों के ओपनर रॉबिन उथप्पा और अजिंक्य रहाणे ही भरोसेमंद निकले। गांगुली की टीम में बल्लेबाजों का रन औसत 123.93 रहा, वहीं धोनी की टीम में बल्लेबाजों का औसत 142.72, इससे थोड़ा ज्यादा मगर इस सीजन नाकाफी रहा।
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दोनों टीम में तीन खिलाड़ी कॉमन
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सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी दोनों की टीमों में ये तीन खिलाड़ी कॉमन रहे, अशोक डिंडा, स्टीवन स्मिथ और मिचेल मॉर्श। स्मिथ ने दादा की टीम के लिए 2012 में 362 रन और 2014 में 270 रन बनाए थे। वहीं, इस साल तो मॉर्श और स्मिथ दोनों ही इंज्युरी के चलते धोनी की टीम में ज्यादा देर नहीं टिके।
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गांगुली चेसिंग तो धोनी डिफेंड में फेल
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गांगुली की अगुआई में पुणे वारियर्स लक्ष्य का पीछा करते हुए आईपीएल में एक नहीं पूरे आठ दफे फेल रही। वहीं, धोनी के कमजोर बॉलिंग अटैक के चलते मैच में उनकी बाद की गेंदबाजी काम नहीं आई। सुपरजाइंट्स 195 जैसे बड़े लक्ष्य को डिफेंड करने में नाकाम रही।
टी-20 के खेल में एक ऑलराउंडर टीम का सबसे अहम किरदार होता है। गांगुली की पुणे वारियर्स को एक अच्छे ऑलराउंडर की कमी हर जगह खली। हालांकि उनकी टीम में जेसी रायडर और मार्लोन सैमुअल्स जैसे दिग्गज थे, लेकिन जल्दी ही उनका हुनर टूर्नामेंट में कहीं खो गया। वहीं, धोनी की पिछली टीम चेन्नई सुपरकिंग्स में ड्वेन ब्रावो जैसा ऑलराउंडर था लेकिन इस बार सुपरजाइंट्स में ऐसे ऑलराउंडर की कमी उन्हें भी खली।