कुछ लोग भूत-प्रेतों पर यकीन नहीं करते हैं, लेकिन भूतिया गुड़ियाें की कहानी किसी लेखक के दिमाग की उपज नहीं है। बल्कि भूतिया गुड़ियाें की कई कहानियां व फिल्में असल घटना पर आधारित हैं। फिल्म 'एनाबेल क्रिएशन' एनाबेल सीरीज की सबसे डरावनी फिल्म मानी जाती है। जिन लोगों को भूत-प्रेतों से डर नहीं लगता, यह फिल्म देखते वक्त उनकी भी रूह कांप उठी थी। जानें भूतिया गुड़ियों, वूडू तंत्र विद्या व ब्लैक मैजिक के बारे में....
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यहां है सबसे बड़ा वूडू का मंदिर
वूडू दुनिया भर की आदिम जातियों, आदिवासियों का प्रारंभिक धर्म रहा है। हर देश में इसका नाम और तरीका अलग हो सकता है, लेकिन यह है झाड़-फूंक, जादू-टोने, काल्पनिक देवता और कबीले की प्राचीन परंपरा का धर्म। इसे पूरे अफ्रीका...
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इसे पूरे अफ्रीका का धर्म माना जा सकता है, लेकिन केरीबी द्वीप समूह में आज भी यह जादू की धार्मिक परंपरा जिंदा है। इसे यहां वूडू कहा जाता है। हाल-फिलहाल बनीन देश का उइदा गांव वूडू बहुल क्षेत्र है। यहां सबसे बड़ा वूडू मंदिर है, जहां विचित्र देवताओं के साथ रखी है जादू-टोने की वस्तुएं।
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इन कार्यों में होता वूडू का इस्तेमाल
धन-धान्य, व्यापार और प्रेम में सफलता की कामना लिए अफ्रीका के कोने-कोने से यहां लोग आते हैं। वूडू प्रकृति के पंचतत्वों पर विश्वास करते हैं। जैसा की भारत के आदिवासियों में समूह में गाने और नाचने की परंपरा है वैसा ही वूडू नर्तक परंपरागत ढोल-डमरूओं की ताल पर नाच कर देवताओं का आह्वान करते हैं। ये प्रार्थनागत नाच गाना कई घंटों तक चलता है।
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6000 वर्ष से भी पुराना है आदिम धर्म
वूडू आज भी दुनिया भर में जिंदा है। नाम कुछ भी हो पर इसे आप आदिम धर्म कह सकते हैं। इसे लगभग 6000 वर्ष से भी ज्यादा पुराना धर्म माना जाता है। ईसाई और इस्लाम धर्म के प्रचार-प्रसार के बाद इसके मानने वालों की संख्या घटती गई और आज यह पश्चिम अफ्रीका के कुछ इलाकों में ही सिमट कर रह गया है। वूडू को आप...
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वूडू को आप बंजारों, आदिवासियों, जंगल में रहने वालों का काल्पनिक या पिछड़ों का धर्म मानते हैं, लेकिन गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है कि वूडू की परंपरा आज के आधुनिक धर्म में भी न्यू लुक के साथ मौजूद है।
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वूडू से जुड़ी कहानी
कहा जाता है कि 1847 में एक पेड़ पर एरजूली डेंटर नाम की एक वूडू देवी का अवतरण हुआ था। उन्हें सुंदरता और प्रेम की देवी माना जाता था। वह लोगों की परेशानियों को अपने जादू के दम पर दूर कर देती थीं। इससे वहां के स्थानीय कैथोलिक पादरी नाराज थे। उन्होंने इस पेड़ को ही कटवा दिया। बाद में लोगों ने...
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बाद में लोगों ने उसी स्थान पर देवी की मूर्ति बनाई और उसकी पूजा करने लगे। उस देवी की शकि्त के फलस्वरूप अाज भी वहां के जादूगर लोगों की परेशानियां दूर करने का दावा करते हैं।
कैसे होता है काला जादू काला जादू
एक विशेष प्रक्रिया है। काले जादू के प्रयोग से जहां व्यकि्त अपने भाग्य से जुड़ी समस्याअों को सुलझा सकता है वहीं आवश्यकता पड़ने पर वह दूसरे की जान भी ले सकता है। मरने के बाद ...
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मरने के बाद भी दुश्मन की मृत आत्मा को अपनी गुलाम बनाकर मनचाहा काम करवा सकता है। इसके लिए सबसे पहले इसमें एक छोटा सा पुतला बनाया जाता है। यह उस आदमी का रूप होता है, जिसपर काले जादू का प्रयोग किया जाता है।
काले जादू में इस तरह होता मंत्रों का प्रयोग
काले जादू में कुछ विशेष मंत्रों का प्रयोग किया जाता है। इन मंत्रों का ज्ञान केवल गुरू के माध्यम से ही प्राप्त हो सकता है। मंत्र बोलते समय पुतले को सुईयां चुभायी जाती हैं। इससे शत्रु को पीड़ा होने लगती है। कभी-कभी उस पुतले को पूरी क्रिया होने के बाद जमीन में गाड़ दिया जाता है। इससे शत्रु की मृत्यु तक हो जाती है। हालांकि गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय जैसे मंत्रों का प्रयोग करने वाले लोगों पर कभी भी काले जादू का असर नहीं होता है। उल्टा काला जादू करने वाले को खुद की जान के लाले पड़ जाते हैं।