जेएनयू के छात्र नजीब अहमद के गायब होने के मामले में सीबीआई को कोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने नौ संदिग्ध छात्रों की पॉलीग्राफी जांच करवाने के लिए दायर सीबीआई की याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह जांच करवाना आरोपी का अधिकार है, जांच करने वाली एजेंसी का नहीं।
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सीबीआई ने अर्जी दायर कर इन छात्रों की पॉलीग्राफी जांच कराने की अनुमति मांगी थी। छात्रों ने इस अर्जी का विरोध करते हुए इसे खारिज करने की मांग की थी। नजीब अहमद अक्तूबर 2016 से लापता है, जिस पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई थी।
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पटियाला हाउस अदालत के एसीएमएम समर विशाल ने सीबीआई की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले के मुताबिक संदिग्ध या आरोपी के खुद आगे आने पर ही पॉलीग्राफी जांच करवाई जा सकती है। जांच एजेंसी इसके लिए अपने आप अर्जी दायर नहीं कर सकती।
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अदालत ने कहा कि आरोपी की पॉलीग्राफी जांच कराने के संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा निर्देशों का पालन किया जाना जरूरी है। इस मामले में संदिग्ध छात्र इससे इनकार कर चुके हैं, इसलिए केवल उनका इनकार जानने के लिए उन्हें कोर्ट बुलाने का औचित्य नहीं है।
छात्रों की ओर से बहस करते हुए उनके वकील वेद भूषण आर्य व जिवेश तिवारी ने कहा था कि यह अर्जी सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि एजेंसी ऐसी अर्जी दायर ही नहीं कर सकती।