यूपीपीजीएमईई-2016 काउंसलिंग तो खत्म हो गई, लेकिन उसका असर केजीएमयू पर मंगलवार को रहा। चिकित्सा छात्रों के समर्थन में रेजीडेंट डॉक्टर भी आए गए और उन्होंने इमरजेंसी व ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर दिया। ओपीडी और मरीजों की भर्ती बंद करने का प्रयास किया गया।
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यूपीपीजीएमईई काउंसलिंग
- फोटो : amar ujala
हालांकि कुलपति प्रो. रविकांत और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के सक्रिय होते ही, सेवाएं फिर से शुरू हुईं जरूर, लेकिन हड़ताल की सूचना के चलते 25 फीसदी मरीज भी इलाज के लिए नहीं पहुंचे। इस बीच चार और मरीजों ने दम तोड़ दिया।
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बता दें हड़ताल के चलते छह मरीज इलाज न मिलने के कारण पहले ही दम तोड़ चुके हैं। चिकित्सा छात्रों और रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से निपटने का केजीएमयू का दावा फेल हो गया। सोमवार से ही बाधित सेवाओं को ढर्रे पर लाने की कोशिशें केजीएमयू प्रशासन ने की, लेकिन मरीजों को राहत नहीं मिली।
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सही देखभाल न होने से सड़क दुर्घटना में घायल गोंडा निवासी तंजीम अहमद (22) की मौत हो गई। परिवारीजन उसे लेकर सोमवार रात दो बजे ट्रॉमा सेंटर आए थे। कैजुअलिटी में मौजूद लोगों ने डॉक्टरों की हड़ताल बताकर उसे वापस जाने की सलाह दी।
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परिवारीजनों ने उनसे इलाज की गुहार लगाई लेकिन एक घंटे बाद तंजीम की मौत हो गई। इसी तरह शाहजहांपुर निवासी राजेश्वर (40), बहराइच निवासी जोधे (25) की सिर की चोट के कारण मौत हो गई। इसी तरह बिहार से आई नेहा की भी बिना इलाज के मौत हो गई। हालत ये थी कि केजीएमयू में रोजाना 4 से 5 हजार की ओपीडी और 300 से अधिक मरीजों से खचाखचा भरे रहने वाले ट्रॉमा सेंटर में मरीज ही नहीं पहुंचे।
केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत का कहना है ट्रॉमा सेंटर में आने वाले मरीजों के इलाज केलिए न्यूरो सर्जरी, सर्जरी, आर्थोपैडिक, मेडिसिन विभाग केशिक्षकों के ड्यूटी चार्ट जारी कर दिए गए हैं। मरीजों के इलाज से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे चिकित्सकों पर क्या कार्रवाई होनी चाहिए, इसका फैसला डीन करेंगे।