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हड़ताली डॉक्टरों के समर्थन में पूर्व मंत्री: केदार कश्यप ने कहा- सीएम-स्वास्थ्य मंत्री की लड़ाई में फंसे मरीज

Tue, 24 Jan 2023 03:14 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जगदलपुर

सार

मेकाज के 600 बिस्तर वाले अस्पताल में अधिकतर वार्ड खाली पड़े है। कई मरीजों को भी छुट्टी दे दी गई है। तमाम मरीज खुद ही छुट्टी लेकर घर जा रहे हैं और बैगा का सहारा ले रहे हैं। हड़ताल का असर वार्डो में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए देखने को मिल रहा है। सीनियर डॉक्टर एक बार देखने के बाद चले जाते हैं। 
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हड़ताली जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में जगदलपुर पहुंचे पूर्व मंत्री केदार कश्यप। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छत्तीसगढ़ में चल रही जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने भी समर्थन कर दिया है। वह मंगलवार को जगदलपुर मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। वहां उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की लड़ाई में मरीज फंसे हुए हैं। उन्होंने डॉक्टरों की मांग को जायज बताते हुए उनका मानदेय बढ़ाए जाने की मांग रखी। वहीं हड़ताली डॉक्टरों ने अस्पताल परिसर में ही दो बेड लगाकर रक्तदान किया। 
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जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में प्रदर्शन करते हड़ताली डॉक्टर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आपसी लड़ाई से स्वास्थ्य विभाग की स्थिति बदतर
मेकॉज पहुंचे पूर्व शिक्षामंत्री और भाजपा नेता केदार कश्यप ने कहा कि, 17 जनवरी से लगातार डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री को प्रदेश के मरीजों की चिंता करनी चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री जब खुद ही इन डॉक्टरों को मांग को जायज बताते हुए पूरी करने की बात कहते हैं, तो फिर दिक्कत कहां आ रही है। उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की आपसी लड़ाई के चलते स्वास्थ्य विभाग की स्थिति बद से बदतर हो गई है। 
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हड़ताली डॉक्टरों से बात करते पूर्व मंत्री केदार कश्यप। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मरीजों को अस्पताल से ले जा रहे परिजन
छत्तीसगढ़ में पांच दिनों से जूनियर डॉक्टरों के साथ ही इंटर्न, जेआर व अन्य डॉक्टर अपनी मानदेय में वृद्धि नहीं होने के कारण हड़ताल पर हैं। मेकाज सहित सभी जगहों पर स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। सीनियर डॉक्टर के अलावा कुछ डॉक्टर काम तो कर रहे है, लेकिन मरीज की स्थिति को देखते हुए परिजन उन्हें छुट्टी कराकर या तो अपने घर ले जा रहे है या फिर निजी अस्पताल का सहारा ले रहे हैं। 
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जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में रक्तदान करते हड़ताली डॉक्टर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चार सालों से मानदेय में नहीं हुई वृद्धि
प्रदेश में नौ मेडिकल कॉलेज हैं। जूनियर डॉक्टरों की इस हड़ताल में इन कॉलेजों के अस्पतालों में कार्यरत जूनियर डॉक्टर्स, इंटर्न, बोंडेड डॉक्टर्स और मेडिकल कॉलेज के छात्र शामिल हैं। इनका कहना है कि पिछले चार सालों से छात्रों के मानदेय में बढ़ोतरी नहीं की गई है। अभी तक हाथों में काली पट्टी बांधकर काम कर रहे थे। सरकारी अस्पतालों में ज्यादातर काम जूनियर डॉक्टर और इंटर्न के भरोसे रहता है। 
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