फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भतीजे ने बताए शहीद भगत सिंह से जुड़े 7 ऐसे सच, न कभी सुने होंगे न कहीं पढ़ें होंगे

Sun, 22 Apr 2018 04:17 PM IST
रुबी सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
1 of 9
bhagat singh - फोटो : सोशल मीडिया
भतीजे ने शहीद भगत सिंह से जुड़े कई ऐसे सच उजागर किए हैं, जिनके बारे में न कभी किसी से सुना होगा और न ही कहीं पढ़ें होंगे, जानिए।
विज्ञापन

2 of 9
भगत सिंह के भतीजे जगमोहन सिंह
शहीद भगत सिंह की मां की चाह थीं कि बेटे की अकेली मूर्त कहीं न लगे
भगत सिंह के भतीजे व लेखक डा. जगमोहन सिंह ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पत्रकार जुपिंदरजीत सिंह द्वारा लिखी किताब 'डिस्कवरी ऑफ शहीद भगत सिंह पिस्टल एंड हिज अहिंमसाज्' को लांच करने आए थे। यहां उन्होंने बताया कि उनकी नानी और शहीद भगत सिंह की मां की इच्छा थी कि देश में शहीद की अकेले मूर्त न लगे, जहां भी लगे वह तीनों की एक साथ लगे, जिसे अब पूरे देश में करने की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन

3 of 9
bhagat singh - फोटो : सोशल मीडिया
जगमोहन सिंह ने सवाल उठाया कि भगत सिंह ने 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेपी सॉन्डर्स को मारने के लिए क्या सही मायने में 32 कोल्ट पिस्टल का प्रयोग किया था, या ब्रिटिश पुलिस ने इसको शहीद भगत सिंह को फांसी पर चढ़ाने के लिए झूठा सबूत बनाकर प्रयोग किया। इस पिस्टल के प्रयोग को लेकर आज भी संदेह बना हुआ है। इसकी पुष्टि ब्रिटिश पुलिस ने कैसे की थी, यह सवाल भी उठता है।

4 of 9
bhagat singh - फोटो : अमर उजाला
अगर यह पिस्टल शहीद भगत सिंह ने सॉन्डर्स को मारने के लिए प्रयोग की तो सुखदेव की पिस्टल क्यों ब्रिटिश पुलिस खोज नहीं पाई। क्या लाहौर में 17 दिसंबर, 1928 को 32 कोल्ट पिस्टल से ही जेपी सॉन्डर्स को मारा गया था। इनकी जांच होनी चाहिए। जगमोहन सिंह ने बधाई देते हुए लेखक जुपिंदरजीत सिंह की तारीफ की और कहा कि इस किताब के जरिए शहीद भगत सिंह की अहिंसा विचारधारा को बयां किया है, जिससे युवाओं को ओर प्रेरणा मिलेगी।
विज्ञापन

5 of 9
शहीद भगत सिंह की पिस्तौल
लेखक ने अमेरिका में बनी 32 कोल्ट पिस्टल के 86 साल के सफर को इस किताब में पिरोया है, जिसे ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेपी सॉन्डर्स को मारने के लिए 17 दिसंबर, 1928 को इस्तेमाल में लाया गया था। साथ ही ये पक्ष भी रखा गया है कि कैसे शहीद भगत सिंह शायद महात्मा गांधी की तुलना में अहिंसा के एक अधिक मजबूत प्रचारक थे। लेखक ने बताया कि नवंबर 2016 में शहीद की खोई हुई पिस्टल की खोज के बाद इस किताब का विचार विकसित हुआ।
विज्ञापन

6 of 9
शहीद भगत सिंह की पिस्तौल
भगत सिंह ने 1928 में लाहौर में सॉन्डर्स को मारने के लिए इसका इस्तेमाल किया था। पिस्टल का अंतिम लिखित रिकॉर्ड 1931 में था जब लाहौर की एक अदालत ने इसे सुरक्षित रखने के लिए पुलिस को सौंप दिया। लेखक ने बताया कि उन्होंने इस किताब के लिए करीब 12 साल से रिसर्च की। लेकिन इसे 2016 से लिखना शुरू किया। काफी रिसर्च के बाद वे इसे लिखने में कामयाब हुए हैं।
विज्ञापन

7 of 9
शहीद भगत सिंह की पिस्तौल
उन्होंने बताया कि पुस्तक लिखते समय शहीद को जानने की कोशिश की, उसकी विचारधारा को समझने, राष्ट्र को आजादी दिलवाने, क्रांति का विचार और हिंसा और अहिंसा पर उनके विचारों को समझने की उनकी इच्छा को मजबूत किया और इस दिशा में लगातार प्रयास किया। किताब इस बात का प्रमाण है कि पिस्तौल का एक बार उपयोग कैसे किया गया था और ये इस प्रकार, भगत सिंह के क्रांति के विचार का प्रतीक बन गया।

8 of 9
शहीद भगत सिंह
देश के युवाओं की सोच बंजर सी हो गई, जिन्हें जरूरत है शहीद भगत सिंह की तरह इतिहास को पढ़ने की। देश किस ओर जा रहा है, समझ नहीं आ रहा। देश की बेटियां सुरक्षित नहीं है। देश को मानों हिंसा और छोटी सोच ने बांट सा दिया है, जहां देश के ही राजनेता अपनी राजनीति से समाज कल्याण की बजाए सिर्फ अपनी तिजोरी भर रहे हैं। तो युवा सोशल मीडिया, वाट्सअप और फेसबुक से सिर्फ खुद को बंजर बना रहे हैं।
विज्ञापन

9 of 9
23 मार्च 1931 शहीद
डा. जगमोहन सिंह ने बताया कि वे इनदिनों शहीद भगत सिंह के जीवन के वो आखिरी पलों को किताब में बयां करने वाले हैं, जब उनको फांसी लगने वाली थी। इस किताब में वे शहीद भगत सिंह की ओर से आखिरी पलों की किताब, शायरी एवं गजलों को शामिल किया जाएगा, जो उन्होंने अपनी कलम से खुद लिखी हो। उन्होंने बताया कि यह किताब शहीद भगत सिंह के आखिरी पलों को बयां करेगी। इसे वे जल्द बनाएंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें