लंदन ओलंपिक के स्टार पहलवान योगेश्वर दत्त की शादी की तारीख और वेन्यू तय हो गए हैं। जानिए, कौन बनेगी उनकी दुल्हनियां?
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पहलवान योगेश्वर दत्त की शादी
रोहतक जिले के हुमायूंपुर गांव के नंबरदार और कुलदीप बिश्नोई के बेहद करीबी जयभगवान शर्मा की बेटी शीतल के साथ 16 जनवरी को दिल्ली के अलीपुर स्थित बैंक्वेट हॉल में योगेश्वर सात फेरे लेंगे। यहीं पर पहलवान सुशील कुमार की शादी हुई थी। सोनीपत के मॉडल टाउन में रह रहे शीतल के पिता जयभगवान ने शादी के लिए बैंक्वेट हॉल भी बुक करवा दिया है। जल्द ही शीतल मां के साथ शादी की खरीददारी शुरू कर देंगी।
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पहलवान योगेश्वर दत्त की शादी
रिश्ता एक साल पहले योगेश्वर के गुरु एवं लोक गायक मास्टर सतबीर ने यह रिश्ता तय किया था। लेकिन योगेश्वर की शर्त थी कि रियो ओलंपिक तक रिश्ते को उजागर न किया जाए।हजकां युवा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे जयभगवान शर्मा की मास्टर सतबीर से अच्छी दोस्ती रही। एक दिन वे मास्टर सतबीर के पास गए हुए थे। इस दौरान बेटी के रिश्ते को लेकर कहा कि, योगेश्वर होनहार पहलवान है। उसके परिवार से बेटी के रिश्ते की बात करें।
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पहलवान योगेश्वर दत्त की शादी
मास्टर सतबीर ने योगेश्वर से रिश्ते की बात की। योगेश्वर ने एक विधायक की बेटी के रिश्ते पर मना दिया था, लेकिन जब मास्टर ने कहा कि, मेरे दोस्त जयभगवान शर्मा की बेटी का भी रिश्ता आया है। यह सुनकर योगेश्वर ने न हां की और न ही इंकार किया। इसके बाद मास्टर ने योगेश्वर की मां सुशीला देवी व भाई मुकेश से बात की। योगेश्वर व उसका परिवार 1998 से जयभगवान शर्मा को जानते थे। दोनों परिवारों का आपस में आना-जाना था।
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पहलवान योगेश्वर दत्त की शादी
योगेश्वर के साथ-साथ माता सुशीला देवी ने भी रिश्ते को सहमति दे दी। योगेश्वर के माता-पिता शिक्षक रहे हैं। साथ में गुरु सतबीर लोक गायक के साथ शिक्षक भी रहे। वहीं, शीतल जेबीटी और सीटेट करने के बाद जीवीएम कालेज से बीए कर रही है। जयभगवान शर्मा मूलरूप से रोहतक जिले के गांव हुमायूंपुर के रहने वाले हैं। फिलहाल मॉडल टाउन सोनीपत में रह रहे हैं। बेटा वकील है। जयभगवान शर्मा का खरखौदा में गन हाउस व आढ़त की दो दुकानें हैं।
हजकां की टिकट पर सफीदों से लड़ चुके हैं चुनावः कुलदीप बिश्नोई के साथ कांग्रेसी हुए जयभगवान शर्मा ने बताया कि 1991 में पूर्व सीएम भजनलाल से प्रभावित होकर राजनीति में आए। 1995 से 2000 तक रोहतक ब्लॉक समिति के चेयरमैन रहे। 2004 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व सीएम के साथ कांग्रेस छोड़कर हजकां में आए, जहां वे हजकां की युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष बने। 2009 में सफीदों से हजकां की टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।