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एक पहलवान, जो सीएम से भी 'भिड़' गए थे और अब हारकर भी बना दिया बड़ा रिकॉर्ड, 5 अनकही बातें

Tue, 23 Oct 2018 02:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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बजरंग पूनिया
एक पहलवान, जो मंच पर सीएम से भिड़ गए थे। जुनून ऐसा है कि वर्ल्ड चैम्पियनशिप में हार गए, सपना अधूरा रह गया, फिर भी दो ऐसे रिकॉर्ड बनाए कि सब देखते ही रह गए। जानिए, उनके बारे में सब कुछ...
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बजरंग पूनिया
हम बात कर रहे हैं, इंटरनेशनल रेसलर बजरंग पूनिया की, जिनका पहली बार विश्व कुश्ती चैंपियनशिप खिताब जीतने का सपना अधूरा रह गया। साथ ही एक सत्र में तीन बड़े खिताब जीतने का सपना भी टूट गया अधूरा रह गया। भारतीय पहलवान को विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में जापान के ताकुटो ओटोगुरो के हाथों 9-16 की शिकस्त झेलनी पड़ी। गोल्ड मेडल का सपना टूटा और बजरंग को सिल्वर से संतोष करना पड़ा।
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बजरंग पूनिया
हंगरी के बुडापेस्ट में 65 किमी वर्ग में 24 वर्षीय बजरंग को 19 वर्षीय ओटोगुरो से शिकस्त झेलनी पड़ी। वहीं जापानी पहलवान ओटोगुरो ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। वह विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाले जापान के सबसे कम उम्र के पहलवान बने। वहीं बजरंग पूनिया भले ही गोल्ड मेडल चूक गए, लेकिन उन्होंने अपने नाम एक खास उपलब्धि दर्ज करा ली है। वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बन गए हैं।

 

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बजरंग पूनिया
इससे पहले उन्होंने 2013 में फ्रीस्टाइल कुश्ती के 60 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता था। विश्व चैंपियनशिप में भारत के लिए स्वर्ण पदक सिर्फ दोहरे ओलिंपिक पदक विजेता सुशील कुमार ने ही जीता है, जिन्होंने 2010 में मास्को में 66 किलो वर्ग में यह कमाल किया था। वहीं अगर यह खिताबी मुकाबला छोड़ दिया जाए तो ओलिंपक मेडलिस्ट पहलवान योगेश्वर दत्त को फॉलो करने वाले इस युवा पहलवान पूनिया के लिए यह साल अब तक जबरदस्त रहा है।
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बजरंग पुनिया
स्टार पहलवान बजरंग पूनिया का जन्म हरियाणा के झज्जर जिले के खुदान गांव में हुआ। सात साल की उम्र से ही पूनिया कुश्ती के दांव पेच सीखने लगे थे। कुश्ती के लिए बजरंग को उनके पिता ने काफी प्रोत्साहित किया। बजरंग पूनिया के भाई का नाम हरेंद्र सिंह पू्निया है। साल 2015 में उनका परिवार खेल प्रधिकरण के क्षेत्रीय केंद्र में भाग लेने के लिए सोनीपत चला गया और यहीं रहने लगा। बजरंग पूनिया मौजूदा समय में भारतीय रेल में टीटीई के पद पर तैनात हैं।
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bajrang punia
पूनिया के करियर की बात करें तो, उन्होंने 60 किलोग्राम भार वर्ग में  साल 2013 में दिल्ली में आयोजित एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वहीं साल 2013 में ही वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप्स में हंगरी के बुडापेस्ट में बजरंग ने ब्रॉन्ज अपने नाम किया था। ग्लासगो में साल 2014 में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया गया। भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया ने 61 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया था। इसके अलावा 2014 एशियन गेम्स, 2014 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप्स में भी देश के लिए रजत पदक जीत चुके हैं।
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बजरंग पूनिया
वहीं साल 2017 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप्स और राष्ट्रमंडल खेल 2018 में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच चुके हैं। एशियन गेम्स 2018 में बजरंग पूनिया ने फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में जापान के पहलवान तकातानी डियाची को 11-8 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। स्टार पहलवान बजरंग पूनिया को प्रो रेसलिंग लीग में जेएसडब्ल्यू ने 29.5 लाख रूपये में खरीदा था। नीलामी का आयोजन नई दिल्ली में किया गया था। लीग का आयोजन भारत के छह शहरों में किया गया था।
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BAJRANG PUNIA
नई खेल नीति के तहत हरियाणा के पदक विजेताओं को सम्मानित करने के मामले में सरकार और खिलाड़ियों के बीच तल्खी बढ़ गई थी। एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को नई खेल नीति मंजूर नहीं होने पर पुरानी नीति के आधार पर इनाम देने की बात कही। इस पर पहलवान बजरंग ने साफ कह दिया कि सरकार ने पूरा इनाम नहीं दिया तो वह इनाम लेने नहीं जाएंगे। बजरंग ने सीएम के मंच से भी किनारा करते हुए अपने कदम वापस खींच लिए थे। हालांकि ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त उन्हें समझाकर साथ मंच पर ले गए थे।
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