अमृतसर में हुआ हादसा एक ऐसी कड़वी सच्चाई है, जिसे ताउम्र भुलाया नहीं जा सकेगा। इसने वो गहरे जख्म दिए हैं, जिनका मरहम नहीं कोई। अब हादसे को लेकर कई तरह की बातें की जा रही हैं, लेकिन आखिर हादसा होने की वजह क्या थी, आइए जानते हैं...
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अमृतसर ट्रेन हादसा
19 अक्तूबर, दिन शनिवार, अमृतसर में जोड़ा फाटक के पास धोबी घाट पर दशहरे का कार्यक्रम आयोजित किया गया। नवजोत कौर सिद्धू मुख्यातिथि थीं, वे आई भी। भारी संख्या में लोगों का हुजूम उस दिन रावण दहन देखने के लिए उमड़े। क्योंकि कार्यक्रम में एलईडी लगी थी, तो काफी लोग ट्रैक पर खड़े होकर कार्यक्रम देखने लगे। करीब साढ़े 6 बजे, अंधेरा हो चुका था। एक ट्रेन आई और लोगों को कुचलते हुए निकल गई। 59 लोगों की जान चली गई, करीब 70 इस समय अस्पताल में हैं।
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अमृतसर ट्रेन हादसा
कार्यक्रम का इंतजाम सही नहीं था
हादसे की एक वजह, कार्यक्रम का आयोजन सही तरीके से न होना। कहा जा रहा है कि जिस जगह पर कार्यक्रम का आयोजन किया बगया था, वहां इतने लोगों के बैठने का इंतजाम नहीं किया गया। लोगों को ट्रैक से हटने को नहीं कहा गया। एलईडी ट्रैक की तरफ लगाई गई, इसलिए लोग पटरी पर खड़े होकर कार्यक्रम देखने लगे।
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Amritsar train accident
- फोटो : PTI
रेलवे को आयोजन की जानकारी नहीं
रेलवे का कहना है कि उन्हें धोबी घाट पर कार्यक्रम के आयोजन की जानकारी नहीं दी गई थी। अगर उन्हें पता होता, तो पूरे इंतजाम किए जाते। वहां से ट्रेन की आवाजाहरी रोकी जाती। क्योंकि आयोजकों ने रेलवे अधिकारियों को कुछ नहीं बताया, इसलिए रेलवे भी एहतियातन कोई कदम नहीं उठा सका। फिर अंधेरे की वजह से ड्राइवर को ट्रैक पर खड़े लोग नजर भी नहीं आए।
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Amritsar rail accident
- फोटो : ani
मुख्य अतिथि देर से पहुंची
कहा जा रहा है कि मुख्यातिथि नवजोत कौर सिद्धू के देर से पहुंचने के कारण हादसा हुआ। अगर वे समय पर पहुंचती तो समय पर रावण दहन हो जात। कार्यक्रम खत्म हो जाता और ट्रेन के आने से पहले लोग ट्रैक से हट जाते। नवजोत कार्यक्रम शुरू होने के एक घंटे बाद आई, तो सारा आयोजन लेट हो गया।
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अमृतसर हादसा
पटाखों की आवाज में सुनाई नहीं दिया हॉर्न
हादसे की एक वजह रही, पटाखों का शोर। ट्रैक पर काफी संख्या में लोग खड़े थे। जब भी ट्रेन आती है, तो हॉर्न जरूर दिया जाता है। लेकिन रावण दहन की वजह से पटाखों का शोर गूंज रहा था। इस शोर में ट्रेन के हॉर्न की आवाज दब गई। लोग सुन नहीं पाए और ट्रेन उन्हें कुचलते हुए निकल गई।
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Amritsar rail accident
दूर से रावण दहन देखने की चाह
दूर से रावण को जलते हुए देखने की चाहत ने भी 59 लोगों की जान ले ली। कार्यक्रम को देखने के लिए जो लोग पहुंच रहे थे, उनमें से ज्यादातर ट्रैक पर ही खड़े हो गए। वे दूर से रावण को जलते हुए देखना चाहते थे। दूर से रावण दहन काफी अच्छा लग रहा था, एलईडी स्क्रीन भी लगी थी। इसलिए लोग कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे ही नहीं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे
कार्यक्रम के आयोजन को देखते हुए पुलिस बल की मौजूदगी भी कम थी। कहा जा रहा है कि पर्याप्त संख्या में पुलिस सुरक्षा नहीं दी गई थी। जितनी संख्या में लोग पहुंचे थे, उन्हें संभालने के लिए पुलिस वाले कम थे। जो थे, वो कार्यक्रम स्थल तक ही सीमित रह गए। ट्रैक पर खड़े लोगों तक वे पहुंच ही नहीं पाए।