वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतकर ओलंपिक 2020 के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय पहलवान बन गई हैं विनेश फोगाट, पढ़ें तैयारियों को लेकर विशेष बातचीत...
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विनेश फोगाट
पहलवान विनेश फौगाट ने नया इतिहास बना दिया है। वह देश की पहली ऐसी पहलवान बन गई हैं, जिसने वर्ल्ड चैंपियनशिप के मेडल के साथ ओलंपिक में क्वालीफाई किया है। इस तरह विनेश फौगाट अपने पहलवान पति सोमबीर से किया हर वादा पूरा कर रही हैं और अब केवल ओलंपिक मेडल जीतने का वादा बाकी रह गया है।
विनेश फौगाट ने अपने पति से देश के लिए सभी अंतरराष्ट्रीय मेडल जीतने का वादा किया हुआ है। विनेश ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतने के साथ ही ओलंपिक क्वालीफाई करके अमर उजाला से विशेष बातचीत करते हुए जिंदगी के कई राज बताए।
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विनेश फोगाट
विनेश फौगाट अंतरराष्ट्रीय स्तर का हर बड़ा मेडल जीत चुकी हैं, जिनमें एशियन व कॉमनवेल्थ गेम्स का मेडल भी शामिल है। लेकिन वर्ल्ड चैंपियनशिप का मेडल उनके पास नहीं था। वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतने के साथ ही ओलंपिक क्वालीफाई करने का सपना लेकर वह कजाख्सतान पहुंची थीं।
साथ ही उन्हें अपने पहलवान पति सोमबीर को दिया वादा भी पूरा करना था। विनेश ने बताया कि जिस तरह से वह खेल रही थीं, लगता था कि वह गोल्ड मेडल जीतकर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करेंगी। लेकिन वह अपनी कुछ कमियों की वजह से गोल्ड नहीं जीत सकीं।
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विनेश फोगाट
ओलंपिक के लिए ग्राउंड रेसलिंग की कमियों को दूर करूंगी
पहलवान विनेश फौगाट कहती हैं कि उसकी कमी के कारण गोल्ड मेडल चला गया। क्योंकि ग्राउंड रेसलिंग में कमजोर रही और दो बार डेंजर जोन में चली गई। इस बड़ी कमी को दूर करने के लिए प्रैक्टिस की जाएगी, जिससे ओलंपिक में इस तरह की गलती न हो सके।
यहां रैपेचेज ने उसे ओलंपिक क्वालीफाई कराने के साथ ही मेडल दिला दिया, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता है। इसलिए ग्राउंड रेसलिंग पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना होगा। उसका सपना ओलंपिक में जापान की पहलवान को हराकर मेडल जीतना है।
वर्ल्ड की नंबर वन पहलवान को हराते ही मान लिया था मेडल पक्का
भारतीय महिला कुश्ती टीम के चीफ कोच कुलदीप मलिक कहते हैं कि जब विनेश फौगाट ने वर्ल्ड की नंबर वन पहलवान यूएसए की सारा हिल्डेब्रांट को हराया था, उस समय ही यह मान लिया था कि विनेश ओलंपिक में क्वालीफाई करेगी और वह मेडल भी जीतेंगी।
वह कहते हैं कि ओलंपिक क्वालीफायर वर्ल्ड चैंपियनशिप सबसे तगड़ी होती है, जिसमें सभी देशों के पहलवान हिस्सा लेते हैं। इसलिए ही पहलवानों के लिए इस वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतना सपने की तरह होता है, लेकिन विनेश ने यह सपना सच कर दिखाया है।