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वर्ल्ड अर्थराइट्स डेः हड्डी का रोग या गठिया, पढ़ लिजिए 9 भ्रांतियां

Wed, 14 Oct 2015 07:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आज वर्ल्ड अर्थराइट्स डे के मौके पर हम आपको गठिया से जुड़ी 9 ऐसी भ्रांतियों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आप नहीं जानते होंगे। रिपोर्टः आशीष वर्मा, चंडीगढ़
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जोड़ों में दर्द की शिकायत पर लोग क्या करते हैं? हड्डियों के डॉक्टर के पास जाते हैं। बाजार में बिकने वाले तेल का इस्तेमाल करते हैं या कभी कभार झाड़-फूंक करवाते हैं। इधर-उधर के इलाज में लोग समय बर्बाद कर देते हैं। इससे गठिया कम होने के बजाए बढ़ जाता है।
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पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर व रियूमेटोलॉजिस्ट अमन शर्मा ने दावा किया कि गठिया के इलाज में किसी भी तेल या झाड़फूंक का कोई भी असर नहीं पड़ता। तेल तो हड्डियों तक नहीं पहुंच पाता है। ऐसे में कैसे फायदेमंद साबित हो सकता है।

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रियूमेटोलाजिस्ट तो मर्ज के लिए जिम्मेदार ब्लड में मौजूद सेल्स की पहचान कर उनका इलाज कर रहे हैं। अब तो ऐसे ट्रीटमेंट मौजूद हैं, जो गठिया को सौ प्रतिशत ठीक कर रहे हैं। दस से 15 प्रतिशत ऐसे केस हैं, जिनकी दवा थोड़ी महंगी है, लेकिन इलाज तो उपलब्ध है।
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गठिया के कई रूप हैं। कुछ गठिया ऐसे हैं, जो छह हफ्ते में ठीक हो जाता है। इस गठिया को रिएक्टिव अर्थराइटिस कहते हैं, जो इंफेक्शन की वजह से होता है। हो सकता है कि जब लोग तेल या दूसरी दवा का इस्तेमाल करते हैं और उन्हें राहत मिलती है तो उनमें रिएक्टिव अर्थराइटिस हो।
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डॉ. अमन शर्मा कहते हैं कि लोगों में अर्थराइटिस (गठिया) की जागरूकता बहुत कम है। जोड़ों के दर्द को वे हड्डियों का दर्द समझ लेते हैं। इनमें अंतर समझना होगा। हड्डियों में दर्द तभी होगा, जब चोट लगी होगी, जोड़ों का दर्द कहीं भी हो सकता है। लोगों को सीधे फिजीशियन के पास जाना चाहिए।
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गठिया के अलावा और भी कई बीमारियां हो सकती हैं। मसलन एसएलई, वसकुलाइटिस सहित अन्य बीमारियां हैं। यदि जल्दी दिखाएंगे तो बीमारी पर काबू पाया जा सकता। गठिया होने के बाद चलना-फिरना बंद हो जाता है। मौत तक हो जाती है।

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पीजीआई में अर्थराइटिस की स्पेशल ओपीडी है, जो हफ्ते में दो बार होती है। बुधवार व शुक्रवार को। यह पीजीआई की व्यस्त ओपीडी में से एक है। सुबह नौ बजे से लेकर शाम छह से सात बजे तक चलती रहती है। यहां पर जम्मू से लेकर राजस्थान तक के मरीज आते हैं। पिछली ओपीडी में कुल 293 पेशेंट आए थे। आस पड़ोस के राज्यों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को बोझ बढ़ता जा रहा है।
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ऐसे बचें गठिया से- स्मोकिंग करते हैं तो उसे छोड़ दें। पाया गया है जो लोग स्मोकिंग करते हैं, उनमें गठिया होने का ज्यादा खतरा है। बैलेंस डाइट लें। इससे इम्यून सिस्टम ठीक होता है। एक्सरसाइज करते रहें। समय-समय पर जांच करवाते रहें। वजन को काबू रखें। जब भी जोड़ों में दर्द हो तो तुरंत फिजीशियन को दिखाएं। तनाव पर काबू रखें।
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