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सबसे बड़ा सवाल? आतंकी थे किडनैपर तो SP जिंदा क्यों?

Mon, 11 Jan 2016 10:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पठानकोट
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पठानकोट एयरबेस पर हुए आंतकी हमले में NIA की जांच में सबसे बड़ा सवाल ये है, आतंकियों ने एसपी सलविंदर को जिंदा क्यों छोड़ा? देखिए, कैसे गहराया शक?
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सबसे बड़ा सवाल? आतंकी थे किडनैपर तो SP जिंदा क्यों?

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एनआईए की टीम को यह बात नहीं जंच रही कि सबूत मिटाने के लिए जब आतंकवादियों ने एकागर सिंह को मार डाला तो एसपी सलविंदर सिंह और उनके कुक को क्यों कुछ नहीं कहा गया। वहीं एसपी सलविंदर सिंह का चरित्र भी संदेहास्पद है। सलविंदर सिंह की भारत-पाक सीमा पर तैनाती कैसे की गई? एनआईए एसपी की भूमिका को संदिग्ध मान रहा है। एसपी अपने कई जवाबों से एनआईए को संतुष्ट नहीं कर पाए हैं।
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दीनानगर अटैक के दौरान भी सलविंदर सिंह गुरदासपुर में तैनात थे। आतंकवादियों से मुकाबला करने के लिए वह एसपी बलजीत सिंह के साथ गए थे। एसपी बलजीत सिंह आतंकियों की गोली से शहीद हो गए थे। एनआईए दीनानगर अटैक को अब पठानकोट के साथ जोड़कर देख रही है। वहीं अब एक नेता का नाम भी एसपी के साथ खुलकर सामने आने लगा है।

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मालूम हो कि सलविंदर सिंह पहले दिन से ही अपने बयानों को लेकर शक के घेरे में हैं। एनआईए को शक है कि एसपी का ड्रग्स कनेक्शन भी संभव है। यह सवाल भी है कि क्या कोलियां की तरफ आते समय सलविंदर के दोस्त राजेश वर्मा ने आतंकियों को ड्रग पैडलर समझकर गाड़ी रोकी थी। क्या ड्रग पैडलर के निर्देश पर ही आतंकियों ने सलविंदर को नुकसान नहीं पहुंचाया।
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एसपी गाड़ी में अपने साथ अपने गनमैन को लेकर क्यों नहीं जा रहे थे? उनके पास उनका सरकारी हथियार भी क्यों नहीं था? एक पुलिस अफसर होने की हैसियत से क्या यह उनका दायित्व नहीं था कि वह अपनी जान पर खेलकर भी आतंकवादियों से मुकाबला करते? एसपी और उनके साथ के लोगों ने चाबी फेंक देने जैसी कोई हरकत कर आतंकियों को गाड़ी पर काबिज होने से रोकने की कोशिश क्यों नहीं की?
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सलविंदर सिह, उनके रसोइये मदन गोपाल और उनके दोस्त राजेश वर्मा, तीनों एक ही घटना के शिकार हैं. तीनों को आतंकियों ने अगवा किया था, लेकिन तीनों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं। बयानों में एक अंतर आतंकवादियों की संख्या को लेकर है। आतंकवादियों के साथ सबसे दूर तक जाने वाले वर्मा का कहना है कि तीन या चार आतंकवादी थे। एसपी और उनके रसोइये का कहना है कि चार या पांच आतंकवादी थे।
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दूसरी विसंगति आतंकवादियों द्वारा राइफल के बट से इनकी पिटाई में सामने आई है। वर्मा और गोपाल के शरीर पर चोट के निशान हैं। एसपी के शरीर पर नहीं हैं। जांचकर्ता इस बात को लेकर भी उधेड़बुन में हैं कि आतंकवादियों ने टैक्सी ड्राइवर इकागर सिंह का गला काट दिया, उसे चाकू से गोदकर मार डाला, वर्मा का गला भी काटने की कोशिश की। लेकिन एसपी को खरोंच तक नहीं आई. ऐसा क्यों हुआ?

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एसपी के दोस्त वर्मा का कहना है कि आतंकवादियों ने अपने कमांडर से बात की थी और वे एकदूसरे को अल्फा और मेजर कहकर बुला रहे थे। सलविंदर का कहना है कि उन्हें और गोपाल को एक नाले में हाथ-पैर-मुंह बांधकर फेंक दिया गया। आतंकवादी उनका दोनों मोबाइल फोन अपने साथ ले गए थे। लेकिन, गोपाल का कहना है कि एक फोन एसपी के पास ही था और उन्होंने उसी फोन से वरिष्ठ अफसरों से बात की थी।
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सलविंदर का कहना है कि खुद को बंधन से छुड़ाने के बाद उन्होंने तड़के 3.30 बजे वरिष्ठ अफसरों को आतंकियों के बारे में जानकारी दी। लेकिन, उनकी इस बात को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. अगर उनसे ऊपर के अफसर उनकी बात को गंभीरता से नहीं ले रहे थे तो उन्होंने पंजाब पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को क्यों नहीं जानकारी दी? एसपी की मोबाइल टॉवर लोकेशन और बताई गई कहानी की टाइमिंग में खासा अंतर आ रहा है।
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