योगगुरु बाबा रामदेव ने आखिर क्यों शादी नहीं की और वे क्यों ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे हैं। इसका कारण अब सामने आया है, जो चौंकाने वाला है।
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baba ramdev
हरियाणा के नारनौल जिले के गांव सैद अलीपुर के सरपंच देशपाल ने बताया कि उनके पिता का नाम रामनिवास व माता का नाम गुलाब देवी है। तीन भाई और एक बहन के परिवार में रामदेव दूसरे नंबर के हैं। बड़े भाई देवदत्त का परिवार गांव में रहता है। वे पहले सीआरपीएफ में थे, अब गांव में खेती कर रहे हैं। रामदेव के माता-पिता और एक भाई व एक बहन का परिवार हरिद्वार में रहता है।
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बाबा रामदेव
सरपंच देशपाल ने बताया कि पिछले दिनों रामदेव पर एक किताब आई थी, ‘द बाबा रामदेव फेनोमेनन : फ्रॉम मोक्ष टू मार्केट’। इसमें बाबा रामदेव को लेकर कई खुलासे किए गए हैं। इसमें बाबा रामदेव के शादी न करने का कारण भी लिखा था। तब उन्हें पता चला कि दयानंद सरस्वती की किताब 'सत्यार्थ प्रकाश' पढ़ने के बाद रामदेव ने शादी न करने का प्रण लिया।
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बाबा रामदेव के छोटे भाई राम भरत
देशपाल कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पतंजलि के जिस आयुर्वेदिक रिसर्च इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया, उसका सीईओ राम भरत है। वह बाबा रामदेव का छोटा भाई है। वह हरिद्वार में पतंजलि आयुर्वेद का रोजमर्रा का काम देखते हैं। उन्हें यहां का अनऑफिशियल CEO कहा जाता है। 38 साल के राम भरत कंपनी ने एमडी आचार्य बालकृष्ण और बाबा रामदेव को रिपोर्ट करते हैं।
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बाबा रामदेव
देशपाल कहते हैं कि 'सत्यार्थ प्रकाश' के पहले चैप्टर में ही ॐ की उत्पत्ति और महत्व के बारे में बताया गया है। इसके बाद रामदेव को ॐ शब्द से बहुत ज्यादा लगाव हो गया। उन्होंने तय किया कि फोन पर वे हमेशा हेलो की जगह ॐ बोलेंगे। रामदेव आज भी इसे फॉलो करते हैं। इसलिए जब भी वे फोन पर बात करते हैं तो इस शब्द का प्रयोग करते हैं, कभी हेलो नहीं बोलते।
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बाबा रामदेव
बता दें कि रामदेव का जन्म 25 दिसंबर 1965 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अली सैयदपुर गांव में हुआ था। उनका बचपन का नाम रामकृष्ण यादव था। गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने के दौरान वे घर से भाग गए थे। इसके बाद उन्होंने हरियाणा के खानपुर में एक गुरुकुल में दाखिला लिया। उनके पिता गुरुकुल ढूंढ़ते हुए पहुंचे और घर वापिस ले जाने लगे तो रामदेव ने मना कर दिया।
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योग गुरु बाबा रामदेव
- फोटो : फाइल फोटो
1990 में बाबा रामदेव की मुलाकात आचार्य बालकृष्ण से हुई। यहां दोनों की दोस्ती हुई। गुरुकुल से शिक्षा ग्रहण करने के बाद बाबा दोनों हिमालय में योग व आयुर्वेद पर ज्ञान अर्जित किया। हरिद्वार के कृपालु आश्रम में 10 नवंबर 1994 में बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण ने चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की। यहां वे योग कैंप लगाने लगे और आयुर्वेदिक पद्धति से लोगों की मुफ्त चिकित्सा भी करने लगे।
बाबा रामदेव तब घर-घर में जाना पहचाना नाम बन गए, जब एक धार्मिक टीवी चैनल ने उन्हें योग के एक प्रोग्राम में फीचर करना शुरू किया। वर्ष 2006 में पतंजलि आयुर्वेद की हरिद्वार में स्थापना की गई। पतंजलि कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है जिसका टर्न ओवर और हिसाब- किताब मिलता हो, लेकिन मोटा अंदाजा है कि बाबा रामदेव के पतंजलि ब्रांड की ही कीमत आज की तारीख में 5000 करोड़ रुपए तक है।