50 साल से ऊपर आयु वर्ग के हर सात में से एक पुरुष में प्रोस्टेट कैंसर के चांस हैं। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट कैंसर भी बढ़ने लगा है। शुरुआती स्तर पर पकड़ में आ जाए तो इसका आसान इलाज संभव है। देरी से पता लगने पर इलाज महंगा है और मरीज को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है।
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इससे बचने का एक ही तरीका है कि 45-50 वर्ष की उम्र में एक बार खुद से टेस्ट करवाएं, क्योंकि इसके बहुत ही कम लक्षण होते हैं। कई ऐसे मरीज देखे गए हैं, जो पूरी तरह से ठीक हैं, मगर जब जांच हुई तो प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि हुई। यह दावा पीजीआई के यूरोलाजी डिपार्टमेंट के एडिशनल प्रो. डॉ. संतोष कुमार ने किया है।
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क्या होता है प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट एक ग्लैंड (गांठ) है, जो पुरुषों की पेशाब थैली के नीचे होता है। प्रोस्टेट एक तरल पदार्थ उत्पन्न करता है, जो सिमन के पार्ट का एक हिस्सा भी है। प्रोस्टेट ग्लैंड की अनियंत्रित ग्रोथ की वजह से कैंसर बनता है। ये प्रोस्टेट के अलावा शरीर के दूसरे पार्ट में भी जा सकता है। कई बार तो इंफेक्शन की वजह से प्रोस्टेट बढ़ा हुआ होता है। पता नहीं चलने पर प्रोस्टेट बोन में पहुंचता है इससे मरीजों को बहुत ही पीड़ा उठानी पड़ती है।
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इस वजह से होता है प्रोस्टेट
जेनेटिक
रेड मीट का अधिक सेवन
इन्वायरनमेंट फैक्टर
बढ़ती उम्र
आहार में पौष्टिकता की कमी
मोटापा
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प्रोस्टेट कैंसर का कैसे पता चलेगा
पेशाब का बार-बार आना
पेशाब का रुक-रुक कर आना
पेशाब में खून का आना
बोन या हड्डी में जबरदस्त दर्द (एडवांस कैंसर में)
दोनों पैरों में अचानक लकवा आना
सिमन में खून आना
अचानक से पेशाब आ जाना
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प्रोस्टेट कैंसर का इलाज क्या है?
प्रोस्टेट कैंसर दो तरह का होता है। एक अरली स्टेज (शुरुआत में पता चलने वाला) और दूसरा एडवांस स्टेज का। यदि प्रोस्टेट कैंसर छोटा है तो उसे रेडिकल प्रोस्टेटेक्टोमी से विधि से हटा देते हैं। यह इस समय का सबसे बेस्ट ट्रीटमेंट है। जब कैंसर का एडवांस स्टेज पर पता चलता है तो इसके लिए सर्जरी, रेडियोथैरेपी व हार्मोन थैरेपी से इलाज किया जाता है। पांच से सात साल तक उसे कंट्रोल कर सकते हैं। जब कैंसर हड्डी तक पहुंच जाता है तो दर्द काफी भयंकर होता है।
टमाटर व फल खाने से रुकता है प्रोस्टेट कैंसर
टमाटर में लाइकोपिन नामक केमिकल पाया जाता है, जो प्रोस्टेट के सेल को कैंसर में बदलने से रोकता है। कई फलों में भी ऐसे तत्व पाए जाते हैं। इसलिए बुजुर्गों को हरी सब्जियों के साथ फलों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। जिनकी फैमिली हिस्ट्री है, उन्हें 45 साल के बाद हर साल टेस्ट करवाना चाहिए और यूरोलाजिस्ट के संपर्क में रहना होगा।