2019 के लोकसभा चुनाव में पहली बार ईवीएम के साथ एक और मशीन देखने को मिलेगी, जिससे लोगों को बड़ा फायदा होगा। जानिए इसकी खासियतें और कैसे काम करेगी।
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ईवीएम मशीन गलत है। इसमें सेटिंग की है। कोई बटन दबाओ वोट एक ही जगह जाएगा। अक्सर चुनावी परिणाम जारी होने के बाद ईवीएम की विश्वसनीयता पर ऐसे सवाल उठते रहे हैं। इस तरह के विवाद से बचने के लिए प्रदेश में पहली बार विधानसभा व लोकसभा चुनावों में ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीन जोड़ी जाएगी। यह मशीन वोटर का वोट ईवीएम में दर्ज हुआ या नहीं, यह संशय दूर करेगी। चुनाव परिणाम में किसी तरह की गड़बड़ी या संदेह होने पर भी यह रिकॉर्ड जांचा सकता है। ऐसे में किसी तरह के विवाद की संभावना नहीं रहेगी।
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वीवीपैट मशीन
8 से 10 सेकेंड नजर आएगा प्रिंट
वीवीपैट (वोटर वेरिफाइएबल पेपर ऑडिट ट्रायल या वेरिफाइएबल पेपर रिकॉर्ड) मशीन ईवीएम से जोड़ी जाएगी। मतदाता को किसी तरह का संदेह होने पर वह मशीने में अपना वोट देख सकेगा। मशीन मतदाता के वोट का प्रिंट तैयार करेगी। यह प्रिंट ग्लास स्क्रीन पर आठ से दस सेकेंड के लिए नजर आएगा। इसके बाद यह प्रिंट मशीन में चला जाएगा। यह इसमें एक रिकॉर्ड की तरह सेफ रहेगा।
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एक हजार मशीनें बैंगलोर से पहुंचीं रोहतक
चुनाव आयोग ने ईवीएम हैकिंग के विवाद का तोड़ निकालते हुए वीवीपैट मशीनें इससे जोड़ने का फैसला लिया है। इसी कड़ी में मंगलवार को बैंगलोर से एक हजार मशीनें रोहतक पहुंचीं। चुनाव में जिले के सभी 763 बूथों पर वीवीपैट मशीन लगेगी। इन वोटर वेरिफाइएबल पेपर ऑडिट ट्रायल मशीनों के इस्तेमाल का कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। - सुरेंद्र सिंह, चुनाव तहसीलदार
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- फोटो : ANI
अधिकारियों ने बताया कि ईवीएम के साथ लिंक वोटर वेरिफेबल पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवी पैट) एक ऐसा सिस्टम है, जिसकी मदद से मतदाता जब वोट डालेगा तो उसे स्क्रीन पर यह दिखाई देगा कि उसने अपना वोट किसको और किस चुनाव चिन्ह पर दिया है। वीवी पैट पर 7 सेकेंड के लिए यह सूचना दिखाई देगी। मतदाता द्वारा वोट डालने के तुरंत बाद कागज की एक पर्ची बनती है। इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उनका नाम और चुनाव चिह्न छपा होता है। किसी तरह का विवाद होने पर ईवीएम में पड़े वोटों के साथ पर्ची का मिलान किया जा सके।
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वीवीपैट
इस मशीन को डिजायन करने का श्रेय भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने को जाता है। जिन्होंने साल 2013 में इसे तैयार किया था। इसका पहली बार इस्तेमाल 2013 में नागालैंड में हुए विधानसभा चुनाव में हुआ था। वीवीपैट में उम्दा क्वालिटी का एक प्रिंटर इस्तेमाल होता है। जिसकी वजह से उससे छपी पर्चियों पर से कई सालों तक स्याही नहीं मिटती है। प्रिंटर में एक खास सेंसर भी लगा रहता है जो खराब क्वालिटी की पर्ची आने पर प्रिंटिंग अपने आप बंद कर देता है।
चुनाव होने हैं। चुनाव की तिथि आयोग को तय करेगा। सरकारी निर्देशों की पालना करते हुए चुनावी तैयारियां की जा रही हैं। इसी कड़ी में वीवीपैट मशीनें पहुंची हैं। - डॉ. यश गर्ग, उपयुक्त एवं जिला चुनाव अधिकारी