आलू न बिकने पर मजबूरी में सिर्फ बोरी बचाने के लिए ही आलू फेंक दिए, क्योंकि आलू का अब कोई खरीदार ही नहीं मिल रहा है।
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किसानों ने सड़कों पर फेंके आलू
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब की मंडियों में आलू की फसल का सहीं दाम न मिलने से खफा किसानों ने मंगलवार को आलू फेंक प्रदर्शन किया। किसानों ने करतारपुर नेशनल हाईवे पर सिनेमा रोड से लेकर बस स्टैंड तक सड़कों पर आलू फेंककर रोष जताया।
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किसानों ने सड़कों पर फेंके आलू
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सड़कों पर गिरे आलू को उठाने के लिए गरीब लोग की भीड़ जमा हो गई। इस वजह से हाईवे पर ट्रैफिक जाम हो गया और वाहनों की लंबी लाइनें लग गई। इससे पूर्व किसान यूनियन की बैठक प्रदेश प्रधान हरमीत सिंह कादिया की अध्यक्षता में करतारपुर की नई दाना में हुई। मीटिंग में किसानों को आ रही पेरशानी पर विचार-विमर्श किया गया।
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किसानों ने सड़कों पर फेंके आलू
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हरमीत सिंह कादिया, महासचिव गुरमीत सिंह गोलेवाल, पूर्ण सिंह शाहकोट, जसबीर सिंह, बहादुर सिंह इत्यादि ने कहा कि केंद्र सरकार और पंजाब सरकार की नीतियों की वजह से राज्य का किसान खुदकुशी की राह पर चलने को मजबूर है। अब आलू की फसल किसानों को रुलाने लगी हैं। उन्होंने कहा कि कोल्ड स्टोर मालिक आलू रखने के लिए मनमर्जी का रेट लगा रहे हैं। सरकार को इसका रेट निर्धारित कर समाचार-पत्रों में देना चाहिए।
एसवाईएल पर किसानों ने कहा कि नहरों का पानी पंजाब को चाहिए, इस पर किसी दूसरे राज्य का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों को आलू, मटर, गाजर, गोभी इत्यादि की फसल बीजने वाले किसानों को प्रति एकड़ 30 हजार रुपये मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा किसानों को गेहूं का रेट 3450 रुपये, मक्की 2000 रुपये और गन्ना 500 प्रति क्विंटल दिया जाए।