इस साल बसंत पंचमी पर बेहद शुभ संयोग बन रहा है। अगर भक्तजन इस विधि से शुभ मुहूर्त में पूजा करेंगे तो मां अपनी कृपा जरूर बरसाएंगी।
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हवन पूजा
बसंत पंचमी 22 जनवरी को है। माघ माह की शुक्ल पंचमी को वसंत पंचमी मनाई जाती है। विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा इस दिन की जाती है। 21 जनवरी को दोपहर बाद 3.33 बजे पंचमी प्रारंभ हो रही है। 22 जनवरी को शाम 4.25 बजे तक पंचमी रहेगी। इस साल बसंत पंचमी पर वर्गोत्तम योग बन रहा है।
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हवन पूजा
सेक्टर-30 स्थित श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि प्रात:काल में मां सरस्वती की पूजन करने का समय होता है, इसलिए बसंत पंचमी का त्योहार 22 जनवरी को ही मनाया जाएगा। बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि सुबह 7.23 बजे सूर्योदय है। सुबह 7.30 बजे से 9 बजे तक राहुकाल है। राहुकाल में पूजा निषेध है।
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पूजा
पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 11.36 बजे से दोपहर 12.24 बजे अभिजीत मुहूर्त में हैं। 22 जनवरी को सुबह 11.22 बजे से मेष लग्न शुरू होगी और 12.54 बजे समाप्त होगी। मेष लग्न में पूजा करने का महत्व इसलिए है कि देवताओं के गुरु बृहस्पति की लग्न पर दृष्टि है और विद्या भाव के स्वामी सूर्य दशम भाव में विराजमान हैं। इस कारण यह महासरस्वती की पूजा का अच्छा समय है।
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मां सरस्वती
- फोटो : अमर उजाला
22 जनवरी को मीन राशि पर चंद्रमा है। इसलिए इस वर्ष बसंत पंचमी पर वर्गोत्तम योग बन रहा है। सेक्टर-15 के जयश्रीराम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख राम बहादुर मिश्र ने बताया कि विद्या में रुकावट, पढ़ने में मन न लगता हो तो सरस्वती पूजा अवश्य करें। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा के साथ सरस्वती चालीसा का पाठ करना उत्तम माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले कपड़े पहनने की मान्यता है।
सरस्वती पूजा का शुभ मुहुर्त
पूजा का मुहूर्त सुबह 07:17 बजे का है और इस मुहूर्त की अवधि 5 घंटे 15 मिनट तक रहेगी। पंचमी तिथि : 21 जनवरी 2018, रविवार को 15:33 बजे प्रारंभ होगी। पंचमी तिथि : 22 जनवरी 2018, सोमवार को 16:24 बजे समाप्त होगी।