इसे कहते हैं सच्चा इश्क और महोब्बत...18 महीने की उम्र में हाथ कट गया था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। खुद से प्यार किया, और फिर दूसरों से इतना मिला कि आज जिंदगी का रोम-रोम प्यार से महकता है। पढ़ें इनकी रोमांटिक लव स्टोरी...
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- फोटो : Social Media
घर में अनाज पीसने की चक्की में हाथ फंसकर 18 माह की उम्र में ही कट गया। परिवार ही नहीं पूरे इलाके के लोगों को लगा कि बेटे का जीवन खराब हो गया। जैसे ही होश संभाला तो फिर वही सुनने को मिलता। लोग कहते थे कि साइकिल भी नहीं चला पाओगे, कार तो दूर की बात है। इन्हीं तानों ने मुझे मजबूत किया और खुद के प्रति प्यार पैदा कर दिया। आज स्थिति उन तानों के उलट है। यह कहानी पीयू के असिस्टेंट प्रोफेसर विनोद चौधरी की है।
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इन्होंने पहले खुद से प्यार किया और फिर करियर बनाया। बाद में अपने प्यार को शादी करके घर ले आए। समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर विनोद चौधरी ने स्नातक की पढ़ाई 2003 में जाट कॉलेज हिसार से की। उसी समय उन्होंने खुद के शरीर को समझा और एजुकेशन के पहलुओं को समझने का टाइम दिया। मेडिकल ही नहीं नॉन मेडिकल की पढ़ाई की। एमबीए के अलावा उन्होंने जेएनयू से वर्ष 2008 से 2012 तक एमए, एमफिल और पीएचडी की।
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पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने करियर की ओर देखा और थाईलैंड में विजिटिंग फेलो बन गए। थाईलैंड के अलावा जर्मनी, इटली आदि देशों के डिसेबल विद्यार्थियों के दाखिले इंडिया में आसानी से नहीं हो रहे थे तो उन्होंने जेएनयू, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय दिल्ली, बीएचयू, डीयू आदि में इन विद्यार्थियों के दाखिले कराए। थाईलैंड में डिसेबल बच्चों के लिए ही नहीं अन्य लोगों के लिए भी वह रोल मॉडल बन गए।
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उन्होंने थाईलैंड में ही रह रहे भारतीयों पर रिसर्च करना शुरू कर दिया। इसका नाम इंडायस फोटो रखा गया। उन्होंने ज्ञान का भंडार विकसित करने के लिए जीआरएफडीटी डॉट कॉम वेबसाइट बनाई। इस वेबसाइट का प्रयोग अब 40 से अधिक देशों के लोग कर रहे हैं। विदेशों में नौकरी करने के बाद उन्हें भारतीय माटी का कर्ज अदा करना था तो वह इंडिया पहुंच गए और वर्ष 2012 में पंजाब विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हो गए। यहां वह एनवायरमेंट सोशलॉजी पढ़ाते हैं।
ऐसे हुईं आंखें चार..
वर्ष 2012 में ही अपने एक दोस्त की शादी में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में गए थे। वहीं पर नीतू से आंखें चार हो गई। वहीं पर प्रेम का इजहार भी कर दिया। एक साल तक प्यार का इंतजार किया और खुद एक साल की नौकरी बेहतर करने के बाद उन्होंने 2013 में शादी कर ली। नीतू पीयू से ही फैशन डिजाइनिंग की स्टूडेंट हैं। प्रो. विनोद चौधरी कहते हैं कि वर्ष 1995 में पिता स्व. शेर सिंह ने पहली साइकिल गिफ्ट की थी ताकि दूर विद्यालय तक जा सकूं। पीयू में नौकरी लगने के बाद पहले वेतन से साइकिल ही खरीदी। साइकिल से ही ऑफिस आता-जाता हूं। लगभग दो लाख किमी साइकिल चला चुका हूं। वह कहते हैं कि यदि खुद से प्रेम न होता तो शायद यहां तक की मंजिल तय नहीं होती। यही नहीं प्रो. चौधरी ने इटली, जर्मनी, थाईलैंड, कनाड़ा समेत कई देशों की यात्रा की है।