नए साल 2018 में इस बार दो चंद्रग्रहण और तीन सूर्यग्रहण लग रहे हैं। ऐसे में लोग ग्रहण के दौरान भूलकर भी ये सभी गलतियां न करें, अशुभ हो सकता है।
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Eclipse
चंडीगढ़ में सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र कहते हैं कि पहला चंद्र ग्रहण 31 जनवरी को दिखाई देगा। पहला चंद्र ग्रहण पुष्य, अश्लेषा नक्षत्र एवं कर्क राशि में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को बुधवार के दिन होगा। ये एक पूर्ण चंद्र ग्रहण है।
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solar eclipse
ग्रहण की काली छाया शाम 5.28 बजे चंद्रमा को स्पर्श पर लेगी। इसके बाद 6.22 बजे खग्रास काल प्रारंभ होगा, जो ग्रहण के मोक्ष काल 8.41 बजे तक रहेगा। ग्रहण 3 घंटे 13 मिनट का रहेगा और दुर्लभ नजारा देखने को मिलेगा। ये ‘ब्ल्यू मून’ कहलाता है और 150 साल से ज्यादा समय के बाद दिखाई दे रहा है।
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Lunar eclipse
दूसरा चंद ग्रहण छह महीने बाद
प्रथम चंद्र ग्रहण के छह महीने बाद दूसरा चंद्र ग्रहण 27 जुलाई को पड़ेगा। ये भी पूर्ण ग्रहण होगा। इसकी अवधि करीब साढ़े तीन घंटे की रहेगी, जो 27 जुलाई की रात 23:54 बजे से प्रारंभ होकर 28 जुलाई की सुबह 03:48: बजे तक चलेगी।
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सूर्यग्रहण
- फोटो : सूर्यग्रहण
2018 में तीन सूर्य ग्रहण लगेंगे
पहला सूर्य ग्रहण 15 फरवरी को पड़ेगा, ये भारत में नहीं दिखेगा। ये सूर्य ग्रहण सिर्फ दक्षिण अमेरिका और अटलांटिक में ही दिखाई देगा। इसके बाद 13 जुलाई को दूसरा सूर्य ग्रहण पड़ेगा, जो ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा, भारत में नहीं। तीसरा सूर्य ग्रहण 11 अगस्त को लगेगा, जो पूर्वी यूरोप, एशिया, नोर्थ अमेरिका और आर्कटिक में दिखाई देगा।
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चन्द्र ग्रहण
ग्रहण काल में इन बातों का रखें ध्यान
ग्रहण के समय अशुभ राशि वालों, रोगी एवं गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण नहीं देखना चाहिए। इस दौरान ईश्वर आराधना, मंत्र जाप, संकीर्तन आदि करने से लाभ मिलता है। पर्व काल के दौरान भोजन करना, भोजन पकाना, सोना नहीं चाहिए। ग्रहण प्रारंभ होने के पूर्व खाने-पीने की वस्तुएं, पके भोजन, दूध, दही, घी, मक्खन, अचार, पानी, आदि में कुश या तुलसी डाल देनी चाहिए। इससे ये खाद्य पदार्थ दूषित नहीं होते हैं। इस दौरान सब्जी काटना, सीना-पिरोना आदि से बचना चाहिए।
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सूर्य ग्रहण का नजारा 2
- फोटो : रॉयटर्स
चन्द्र ग्रहण का यह होगा असर
बीरेंद्र नारायण मिश्र कहते हैं कि ग्रहण के दौरान ज्यों ही ब्रह्मांड में घटना के साथ ऊर्जा की कमी होती है तो प्रत्येक जीव किसी न किसी प्रकार से प्रभावित होता है। बुधवार पूर्णिमा और कर्क राशि पर ग्रहण होने से अच्छी बारिश के योग बनेंगे। साधु, संतों, पंडित, शिक्षार्थी, बुजुर्ग व्यक्ति के लिए कष्टकारी रहेगा। सोना-चांदी, पीतल, गुड़, चीनी, गेहूं में तेजी का रूख होगा। वहीं अराजकता, भूकंप, जातिगत आंदोलन होने की आशंका बन रही है।
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eclipse
ऐसे होता है ग्रहण
जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में राहु व चन्द्रमा की छाया आ जाती है और जिस भाग में यह छाया पड़ती है उस जगह ऊर्जा का संचार कम होता है। ग्रहण के दौरान जो छाया मोटी होती है वह राहु तथा जो बारीक छाया होती है वह केतु कहलाती है। यानि छाया के असर से होने वाले दुष्प्रभाव को ग्रहण कहा जाता है।
यह है वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार, सूर्य 13 अंश (कुल 360 अंश में) जिस राशि में रहता है, उसी राशि में 13 अंश से कम में राहु व केतु आ जाते हैं तो सूर्य एवं चंद्र ग्रहण होते है। यह 12 राशियों में एक राशि पर एक माह तक घूमता है। यह प्रतिदिन एक अंश बढ़ता है। भ्रमण चक्र 360 भागों में बांटा गया है। एक भाग एक अंश का रहता है। 30 अंश की एक राशि होती।