राम रहीम और डेरा सच्चा सौदा को दो बड़े झटके लगे हैं। मामला ऐसा है कि मां, पत्नी और बेटा भी चौंक गए। जानिए पूरा मामला...
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राम रहीम
- फोटो : social media
पहला झटका ये कि हरियाणा के रोहतक की सुनारिया जेल में साध्वी यौन शोषण मामले में सजायाफ्ता डेरामुखी राम रहीम फोन पर बात नहीं कर पाएंगे। प्रदेश सरकार ने उन्हें फोन सुविधा देने से इंकार कर दिया है। जेल व पुलिस विभाग ने राम रहीम को फोन सुविधा देने से हरियाणा व आसपास के राज्यों में लॉ एंड आर्डर की स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई है। जिसे देखते हुए विभाग ने एनओसी नहीं दी।
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Ram Rahim
राम रहीम ने जेल मैनुअल के अनुसार रोजाना पांच मिनट और सप्ताह में 35 मिनट फोन पर बात करने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने इच्छा जाहिर की थी कि अन्य कैदियों की भांति उन्हें भी यह सुविधा मिलनी चाहिए, चूंकि वह भी एक कैदी ही हैं। उनके प्रस्ताव से जेल विभाग ने सरकार को भी अवगत कराया था। जिस पर आईजी हिसार रेंज व जेल विभाग के उच्च अधिकारियों से सरकार ने सभी पहलुओं को मद्देनजर रखते हुए एनओसी जारी करने पर निर्णय लेने को कहा था।
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राम रहीम
जेल विभाग व आईजी हिसार रेंज ने आपस में समन्वय स्थापित करते हुए यह पाया कि राम रहीम को फोन पर बात करने की सुविधा देने से कानून व्यवस्था खतरे में पड़ सकती है। फोन पर बात करने के दौरान डेरामुखी अपने समर्थकों, अनुयायियों व अन्य खासमखास लोगों को कुछ भी निर्देश दे सकते हैं। जिससे प्रदेश में कानून व्यवस्था पर संकट खड़ा हो सकता है। इसके मद्देनजर फोन पर बात करने की सुविधा नहीं दी जा सकती।
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राम रहीम
राम रहीम ने बीते दिनों जेल मंत्री कृष्ण लाल पंवार के सुनारिया जेल का निरीक्षण करने के दौरान भी फोन सुविधा मांगी थी। चूंकि, निरीक्षण के दौरान पंवार सभी कैदियों के साथ-साथ राम रहीम से भी मिले थे। जेल विभाग के पुलिस महानिदेशक के सेल्वराज ने बताया कि राम रहीम के आग्रह पर गंभीरता से विचार किया गया। उन्हें फोन पर बातचीत की इजाजत नहीं दी जा सकती। इससे लॉ एंड आर्डर खराब हो सकता है।
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राम रहीम की मां
दूसरा झटका ये कि हाईकोर्ट के आदेशों पर डेरा सच्चा-सौदा में चल रहे सात शिक्षण संस्थानों को चलाने की जिम्मेदारी सिरसा के डीसी, डीईओ और सरकारी स्कूलों के दो रिटायर्ड प्रिंसिपलों की गवर्निंग बॉडी सौंपी गई है। इन शिक्षण संस्थानों के रोजाना के कामकाज के साथ ही डेरे के अकाउंट्स का जिम्मा भी इसी बॉडी के पास होगा। हाईकोर्ट ने डेरे के अस्पतालों के लिए भी इसी तरह की एडहॉक गवर्निंग बॉडी गठित करने के आदेश दिए हैं।
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Jasmeet Singh Insan
शुक्रवार को सुनवाई शुरू होते ही डेरे के शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों की ओर से सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने कहा कि बैंक खाते सील किए जाने के चलते अब यहां के शिक्षकों, डॉक्टरों और अन्य स्टाफ को वेतन तक जारी नहीं किया जा रहा है। इस पर हरियाणा सरकार ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेशों पर शिक्षण संस्थानों को चलने के लिए गवर्निंग बॉडी गठित कर ली गई है। अब यही बॉडी इनके खातों को अपनी निगरानी में चला सकती है।
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Ram rahim
हाईकोर्ट ने इसकी इजाजत देते हुए डेरे के हॉस्पिटल्स भी इसी तरह सिरसा के सीएमओ के तहत गठित की जाने वाले एडहॉक गवर्निंग बॉडी द्वारा चलाये जाने के आदेश भी दे दिए हैं। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस एजी मसीह एवं जस्टिस अवनीश झिंगन की फुल बेंच ने पहले ही एक बात साफ कर दी है कि मौजूदा मैनेजमेंट इन स्कूलों और इनके बैंक खातों को ऑपरेट नहीं करेगी। लेकिन इन शिक्षण संस्थानों में हजारों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
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जेल में राम रहीम से मिलने आई मां, बेटा-बेटी और दामाद
हाईकोर्ट ने कहा कि उनके शिक्षण में कोई परेशानी न आए इसके लिए डेरे की स्कूल मैनेजमेंट की बजाय सिरसा के डीसी, डीईओ और सरकारी स्कूलों के दो रिटायर्ड प्रिंसिपलों की एक ऐड-हॉक गवनिंर्ग बॉडी ही इन शिक्षण संस्थानों को चलाएगी और इनके खातों को ऑपरेट करेगी। इस दौरान सिरसा के सिविल सर्जन ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर डेरे के हॉस्पिटल्स और ब्लड बैंक के सभी डॉक्टर्स, पर मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मियों की जानकारियां दीं।
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राम रहीम के साथ हनीप्रीत
सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सिविल सर्जन ने कहीं भी नहीं बताया कि डेरे के हॉस्पिटल्स में आने वाले विजिटिंग डॉक्टर्स कहां से आते थे और यहां के डॉक्टर्स की क्या क्वालिफिकेशन है जबकि अन्य स्टाफ की शैक्षणिक योग्यता की पूरी जानकारी दी गई है। इस पर हाईकोर्ट ने सभी डॉक्टर्स की पूरी जानकारी तलब कर ली। गुप्ता ने कहा कि डेरे के हॉस्पिटल्स की इमारतें बिना सीएलयू लिए बनाई गई है।
इन पर हाईकोर्ट को निर्देश देने चाहिए। इस पर डेरे के वकील सीनियर एडवोकेट ने कहा कि अगर कोई आपत्ति हो तो पीजीआई के तहत भी इन हॉस्पिटल को चलाया जा सकता है। यह भी कहा गया कि इन्हें एमसीआई के माध्यम से भी चलाया जा सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि डेरे के हॉस्पिटल्स को चलाने की हाईकोर्ट की इजाजत का यह मतलब न समझा जाये कि यह हास्पिटल जायज हैं। इन्हे फिलहाल चलाए जाने की इजाजत दी जा रही है।