सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पनपे तनाव के बीच बीएसएफ ने सरहद पर ही पाक सेना को मात देने के लिए चक्रव्यूह रच लिया है। जानिए क्या?
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BSF
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तनाव के बीच सीमा पर हमारी बीएसएफ पूरी तरह से मुस्तैद है। प्रत्येक जवान को पाकिस्तानी सेना की बटालियन और कंपनी कमांडर तक की सटीक जानकारी है।
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बॉर्डर से सटे गांवों के लोग
बीएसएफ जवानों का कहना है कि उनके किसी भी अधिकारी ने सीमांत गांव के लोगों को पलायन के लिए नहीं कहा है, गांव के लोग ही उनकी शक्ति हैं।
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Border Security
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सरहद पर बीएसएफ की अतिरिक्त बटालियन आधुनिक हथियारों से तैनात है। जवानों का कहना है कि सरहदी गांवों की सुरक्षा के लिए कई प्रकार के सुरक्षा प्रबंध किए हैं।
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बॉर्डर पर एरिया में फसल काटते हुए लोग
फेंसिंग पार जिन किसानों की धान, गाजर, पालक, धनिया व अन्य फसल लगी है उनकी देखरेख के लिए किसान खेतों में जा रहे हैं।
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पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बॉर्डर से सटे गांवों के हाल
इन किसानों के साथ बीएसएफ जवान सुरक्षा के लिए भेजे जा रहे हैं। कई किसानों की धान की फसल पक चुकी है, उसकी कटाई चल रही है।
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Border Security
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अगर हमले की कोशिश हुई तो सरहद पर गश्त कर रहे बीएसएफ के एक जवान ने बताया कि पाक सेना को सबसे पहले बीएसएफ का सामना करना पड़ेगा।
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बता दें कि पाकिस्तानी सेना ने 1971 में ममदोट सेक्टर के राजा मोहतम तक कब्जा कर लिया था जिसे बीएसएफ के अधिकारी आरके वधवा ने पाक सेना को करारा जवाब देते हुए कब्जा छीना था।
पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बॉर्डर से सटे गांवों के हाल
सीमांत गांव राजाराय निवासी बख्शीश सिंह व फारू वाला के महिंदर सिंह ने बताया कि जो तनाव सरहद पर कारगिल युद्ध व संसद पर हुए हमले के दौरान पैदा हुए थे, बॉर्डर पर वैसी स्थिति नहीं है। इस वजह से वे अपना घर छोड़कर नहीं गए।