अगर आप भी खाने के तेल का इस्तेमाल करते हैं तो जरा संभल जाएं। हम आपको बता रहे हैं कि कौन-सा तेल खाने से फायदा होगा और कौन-सा तेल नुकसानदायक है।
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एक ओर फिट होने का जुनून और दूसरी ओर शरीर के लिए आवश्यक आहार लेने की अनिवार्यता। आहार है तो तेल तो होगा ही। ध्यान रखने वाली बात यह है कि खाने में तेल कितना होना चाहिए, ताकि शरीर चुस्त रहे और दिल मजबूत। चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तेल शरीर के लिए आवश्यक है लेकिन उसकी मात्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यह बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि रूटीन में तेल की पर्याप्त मात्रा लें और ऊपर से समोसे, पराठे, पूड़ी, आचार और फ्राइड स्नैक्स भी खाएं। ऐसा करेंगे तो तेल शरीर को नुकसान पहुंचाएगा। सवाल यह भी है कि कौन सा तेल इस्तेमाल करें। विशेषज्ञ कहते हैं कि जिस तेल में ओमेगा-3 की मात्रा ज्यादा होती है, वह दिल के लिए फायदेमंद होता है। इसमें मूंगफली, सरसों, ऑलिव ऑयल प्रमुख हैं।
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सैचुरेटेड और अन सैचुरेटेड फैट को समझें
खाने के तेल दो तरह के होते हैं। सैचुरेटेड और अन सैचुरेटेड। सैचुरेटेड फैट्स में घी, मक्खन, क्रीम, ऑलिव आयल और नारियल का तेल शामिल है। सैचुरेटेड फैट्स को शरीर आसानी से पचा नहीं पाता। डायटीशियन के अनुसार, शारीरिक श्रम करने वाले लोग तो इसे आसानी से पचा लेते हैं। शारीरिक रूप से कम सक्रिय लोगों के लिए यह समस्या खड़ी कर सकता है। सैचुरेटेड फैट्स बैड कोलेस्ट्रॉल को भी बढ़ाते हैं। डायटीशियन का कहना है कि अपवाद के तौर पर नारियल तेल कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाता। सैचुरेटेड तेल का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए। वहीं, अनसैचुरेटेड फैट्स में रिफाइंड और वनस्पति घी मुख्य रूप से शामिल हैं। इसमें रिफाइंड तेल को अच्छी तरह से प्रोसेस किया जाता है। इससे तेल की लाइफ और टेस्ट तो बढ़ता है पर तेल में ट्रांस फैट आ जाते हैं। ये ट्रांस फैट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं।
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स्मोकिंग प्वाइंट का रखें ख्याल
शेफ विश्वदीप बाली का कहना है कि हर तेल का एक स्मोक प्वाइंट होता है। यह वह तापमान होता है जो तेल को गर्म करने पर नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को निकाल देता है। जिस तेल में स्मोकिंग प्वाइंट ज्यादा होते हैं, वह फायदेमंद होते हैं। देसी घी और सरसों के तेल में स्मोकिंग प्वाइंट ज्यादा होता है। सबसे ज्यादा स्मोकिंग प्वाइंट देसी घी का होता है। यही कारण है कि देसी घी में पका खाना खाने से भूख कम लगती है। विश्वदीप बाली ने कहा कि ऑलिव आयल कोल्ड होता है और उसको कच्चा या हल्का गरम ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऑलिव आयल का स्मोकिंग प्वाइंट लो होता है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
सरसों का तेल और देसी घी हैं सबसे बेहतर
डायटीशियन मालिनी दहिया कहती हैं कि सरसों का तेल और देसी घी सबसे बेहतर हैं। इनके इस्तेमाल से शरीर में वसा की कमी पूरी होती है और सही मात्रा में लेने पर यह नुकसान भी नहीं करते। देसी घी तो ज्यादा देर तक गरम करने पर भी नुकसान नहीं करता है। ऑलिव आइल में मूफा (मोनो अन सैचुरेटेड) और पूफा (पॉली अन सेचुरेटेड) कम होते हैं। इसमें ओमेगा-3 अच्छी मात्रा में पाई जाती है। इसी तरह, सैचुरेटेड फैट ज्यादा होने की वजह से नारियल तेल को अच्छा नहीं माना जाता। हालांकि यह कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ाता।
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फाइल फोटो
सलाद में डालें ऑलिव आयल
शेफ मनोहर रेनी ड्यूडी का कहना है कि देसी घी और ऑलिव ऑयल दोनों ही बेहतरीन होते हैं। हालांकि ऑलिव ऑयल को तलने में नहीं बल्कि सलाद में कच्चा डालकर खाना चाहिए। इसके साथ ही देसी घी और सरसों का तेल खाने में इस्तेमाल करें तो यह स्वास्थ्य के लिए लाभ दायक होगा।
तेल-घी खाना चाहिए, मगर उसकी सीमा तय करनी होगी। जितनी आपको कैलोरी की जरूरत होती है, उसका 25 फीसदी कैलोरी फैट से मिलना चाहिए। एक दिन में सिर्फ चार से पांच चम्मच तेल लेना चाहिए लेकिन इसमें समोसा, फ्राइड स्नैक्स, दूध और आचार का तेल नहीं शामिल हैं। यदि आप इसे लेते हैं तो तेल की मात्रा बढ़ती है। सबसे खतरनाक वो तेल होता है, जिसे बार-बार गर्म कर खाद्य पदार्थ को तला जाए। यह तेल ट्रांस फैट में तब्दील होता है। जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है। - प्रो. संजय भदादा, एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट पीजीआई
कौन सा तेल है आपके लिए बेहतर
खाने के तेल में मूफा और पूफा, दोनों का बेहतर तालमेल होना चाहिए। तेल खरीदते समय ओमेगा 3 और ओमेगा 6 का रेश्यो अच्छा हो यह देख लें। लगातार एक ही तेल खाने से अच्छा है तेल बदल-बदल कर इस्तेमाल करें। इससे शरीर को सभी जरूरी फैटी एसिड मिलेंगे। तलने के लिए वह तेल इस्तेमाल करें, जिसका स्मोक प्वाइंट अधिक हो। सरसों और मूंगफली का तेल इस लिहाज से बेहतर है। पराठों के लिए देसी घी, मक्खन या ऑलिव ऑयल इस्तेमाल कर सकते हैं। तेल खरीदते समय बोतल पर जीरो ट्रांस फैट लिखा हो, यह जरूर देख लें। साथ ही, नॉन हाइड्रोजिनेटिड और नॉन पीएचवीओ भी लिखा हो। लेकिन जीरो ट्रांस फैट का फायदा तब तक है, जब तक आप उस तेल को गर्म नहीं करते। किसी भी तेल को अगर बार-बार गर्म किया जाए तो उसमें ट्रांस फैट्स बन जाते हैं। खरीदते समय यह भी देखें कि तेल की बोतल पर कोल्ड कंप्रेस्ड ऑयल लिखा हो। कोल्ड कंप्रेस्ड में बिना कोई केमिकल मिलाए बेहद कम तापमान पर तेल निकाला जाता है। यह सबसे बेहतर होता है। ध्यान रखें कि एक साल से पुराना तेल और 6 महीने से ज्यादा पुराना देसी घी यूज न करें।